फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी से हटाने के बाद से ही फिल्म को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच इसे लेकर एक नई जानकारी सामने आई है। वो यह कि 'सतलुज' और 'पंजाब 95' से पहले भी मेकर्स ने इस फिल्म का एक और नाम तय किया था।
क्या था फिल्म का नाम ?
फिल्म 'सतलुज' की रिलीज को लेकर मेकर्स को लंबा इंतजार करना पड़ा। फिल्म रिलीज भी हुई मगर सिर्फ दो दिन बाद ही इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार 'सतलुज' इस फिल्म का तीसरा नाम है।
इससे पहले मेकर्स ने फिल्म का नाम 'पंजाब 95' रखा था। वहीं सबसे पहले जो फिल्म का नाम तय किया गया, वो 'घल्लुघारा' था। सीबीएफसी के हिसाब से यह नाम काफी विवादास्पद था। तब कहीं मेकर्स ने इसे बदल कर 'पंजाब 95' किया। मगर इस पर भी जब सेंसर बोर्ड राजी नहीं हुआ तब इसे 'सतलुज' नाम से रिलीज किया गया।
सतलुज फिल्म रिव्यू
- फोटो : इंस्टाग्राम-@Zee5
क्या होता है 'घल्लुघारा'?
फिल्म 'सतलुज' में काफी वीभत्स दृश्य दिखाय गए हैं। कहानी के मुताबिक मेकर्स को 1984 से लेकर 1995 तक पंजाब में हुई अनगिनत मौतें प्रदर्शित करनी थी। इसे ही देखते हुए मेकर्स ने पहले इसका नाम 'घल्लुघारा' रखा था। सिख धर्म में इस शब्द का अर्थ नरसंहार होता है।
1746, 1762 और 1984 में हुए नरसंहार के देखते हुए इस फिल्म का नाम 'घल्लुघारा' रखा गया था। सीबीएफसी को फिल्म 2022 में 'घल्लुघारा' के नाम से ही दी गई थी। मगर इस शीषर्क के साथ विवाद उत्पन्न होने के संशय से मेकर्स को इसे बदलने का सुझाव दिया गया।
सतलुज फिल्म रिव्यू
- फोटो : इंस्टाग्राम-@Zee5
फिल्म ‘सतलुज’के बारे में
फिल्म ‘सतलुज’ पंजाब के मानव अधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। यह कहानी 1990 के दशक के उस अशांत दौर की है जब पंजाब के अंदर बेगुनाहों को मारा जा रहा था। न तो उनके परिजनों को उनकी खबर मिलती न ही अंतिम संस्कार की जानकारी।
फिल्म में दिलजीत के अलावा अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान जैसे कलाकार अहम किरदारों में नजर आए हैं।