कलाकार: कर्स्टन स्टूअर्ट, नाओमी स्कॉट, एला बैलिंस्का, पैट्रिक स्टूअर्ट आदि।
लेखक-निर्देशक-निर्माता: एलिजाबेथ बैंक्स
स्टूडियो: सोनी पिक्चर्स
हिंदी सिनेमा में निर्देशक रामगोपाल वर्मा को कई मायनों में ट्रेंड सेटर माना जाता है। रामू ने 2006 में अपनी ही फिल्म शिवा का इसी नाम से और 2007 में रमेश सिप्पी की फिल्म शोले का रीबूट रामगोपाल वर्मा की आग बनाकर किया। रीबूट का मतलब है किसी सुपरहिट फिल्म को नए जमाने के हिसाब से फिर से बनाना और मूल किरदारों और फिल्म के भाव को वैसा ही रखते हुए उसे एक नया जामा पहनाना। रामू अपनी इन दोनों कोशिशों में सुपरफ्लॉप रहे तो हिंदी सिनेमा में फिर किसी निर्देशक ने ऐसा दुस्साहस नहीं दिखाया।
हॉलीवुड में मार्वेल स्टूडियो ने पहले हल्क और फिर स्पाइडरमैन की कहानियों को रीबूट किया और दोनों बार कामयाबी हासिल की। डिजनी ने अलादीन को रीबूट किया और मुंह की खाई। सोनी पिक्चर्स ने मेन इन ब्लैक को रीबूट करने की कोशिश की और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी। अब बारी चार्लीज एंजेल्स की है। हॉलीवुड की फिल्में एक कालखंड के दर्शकों की मन:स्थिति के हिसाब से बनती हैं। ऐसे में कैथोड ट्यूब टीवी के जमाने की चार्लीज एंजेल्स की कहानी ओटीटी के दौर में दर्शकों से कितना कनेक्ट कर पाती है, देखने वाली बात होगी।
चार्लीज एंजेल्स का पहला ट्रेलर इसकी निर्देशक एलिजाबेथ बैंक्स की सोच का खाका खींचता है। बैंक्स इस फिल्म की लेखन टीम का भी हिस्सा हैं और परदे पर भी वह मौजूद हैं बॉसली के किरदार में। डिजनी की फ्लॉप फिल्म अलादीन वाली नाओमी स्कॉट यहां भी हैं और साथ में हैं कर्स्टन स्टूवर्ट व एला बैलिंस्का। नाओमी, कर्स्टन व एला उस सुपरहिट कहानी के रीबूट की एंजेल्स बनी है, जिसका एक रीबूट 19 साल पहले भी बन चुका है, जिसे ड्रयू बैरीमोर, कैमरन डियाज और लूसी लियू की तिकड़ी ने हिट कराया था।
जैसाकि मार्वेल स्टूडियो की पिछले दो तीन साल में आई फिल्मों में दिखता है, वैसा ही महिला सशक्तीकरण का अंडरकरंट इस फिल्म में भी है। दिक्कत भारतीय दर्शकों के साथ ये है कि उन्हें कबीर सिंह भाता है। वीरे दी वेडिंग उनके लिए अब भी दूर की कौड़ी है।