84 रुपए लेकर पहुंचा था मुंबई
गौरव ने आगे कहा कि मुझे जल्द ही एहसास हो गया कि ये वो नहीं है जो मैं करना चाहता हूं। मैंने पापा से बोल दिया, 'पैसे बचा लो, बड़ा महंगा कोर्स है। मैं नहीं करूंगा।' पापा ने कहा, 'आधे साल काम कर लेना, फिर जो मन में आएगा।' बिल्कुल आधा साल जॉब किया और फिर थिएटर ज्वाइन कर लिया।
मेरे पापा आईआईटी-बीएचयू से इंजीनियर हैं, भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, लेकिन मुझ पर कुछ थोपा नहीं गया। मुंबई जाने के बाद अपने वित्तीय संघर्षों के बारे में बात करते हुए एक्टर ने बताया कि मेरे खाते में 84 रुपये थे। मैं एचडीएफसी बैंक के सामने से गुजरता था और बैंक को देख कर कहता था, 'मेरा ख्याल रखना।' मैं आते-जाते बैंक को मत्था टेक के जाता था।
मैं खुद्दार टाइप का इंसान था
उन्होंने याद किया कि कैसे उनके पिता ने सीमित साधनों के बावजूद उनका समर्थन किया था। मेरे पास अभी भी पापा के वो लेटर हैं, जहां लिखा होता था, '2,000 रुपये भेज रहा हूं, इससे ज्यादा नहीं है।' उन्होंने कहा कि कठिनाइयों के बावजूद उन्हें बोझ महसूस नहीं हुआ। हमें वक्त लगता था तकलीफ नहीं।
ऑटो के पैसे नहीं हैं, तो पैदल आ जायेंगे। मैं थोड़ा खुद्दार टाइप था। मैं देने वाला बनना चाहता था, लेने वाला नहीं। उस दौर में अपने परिवार को लिखे एक पत्र को याद करते हुए उन्होंने कहा कि लेटर में लिखा था कि अभी पैसे के मामले में सफलता नहीं मिली है, लेकिन मुझ पर भरोसा रखें। भविष्य उज्ज्वल है। मुझे और सीखने की जरूरत है।
सफलता मेरे सिर पर नहीं चढ़ती
‘धुरंधर’ और इसके सीक्वल से नई लोकप्रियता हासिल करने के बावजूद गौरव गेरा ने इस बात पर जोर दिया कि सफलता ने उनके दृष्टिकोण को नहीं बदला है। उन्होंने कहा कि बहुत कम देर के लिए मैंने प्रशंसा को बहुत गंभीरता से लिया। कुछ साल पहले मुझे लगने लगा था कि लोग मुझे लीजेंड बोल रहे हैं और शायद मैंने उसको थोड़ा सीरियसली ले लिया था।
फिर मुझे लगा, 'नहीं, मुझे इसे तोड़ना होगा।' महानता वाली भावना अहंकार लाती है। मैं उस जोन का नहीं होना चाहता था। इसलिए मैं अपने आप को चेक में रखता हूं। क्या धुरंधर की सफलता ने उन पर असर डाला है?
इस पर उन्होंने कहा कि अब नहीं आता। शायद 10 साल पहले आ जाता। अब लगता है ये बस एक काम है जो मैंने किया और लोगों ने पसंद किया। यह उन कामों में से एक है जो मैंने किया। आज आप रॉकिंग हो, कल नहीं हो। मैंने इतने उतार-चढ़ाव देखे हैं कि अब फर्क नहीं पड़ता।