चौराहों पर ड्यूटी देते, रात में गश्त लगाते या किसी सफेद एंबेसडर से उतरते किसी पुलिस अफसर को कभी आपने एक पिता, एक मां या किसी दूसरे इंसानी रिश्ते की डोर से देखने की कोशिश की है? नहीं ना। दिन रात किसी न किसी अपराधी के पीछे भागते रहने वाले इन पुलिसवालों की अपनी भी एक दुनिया है, जहां एक पिता अपनी बेटी की शादी के लिए भागदौड़ कर रहा है, एक मां अपनी बेटी को समझा रही है कि ये देश अच्छा है!
और, देश कितना अच्छा है, ये पुलिस अफसर की बेटी को समझ आता है उस घटना से जिसमें देश की राजधानी में एक युवती को बलात्कार के बाद कपड़े उतारकर सड़क पर फेंक दिया जाता है। सात साल पहले की इस वारदात ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। इसी घटना की केस फाइल पर बना है दिल्ली क्राइम वेब सीरीज का पहला सीजन। यह ऐसी घटना है जिसके हर पहलू से देश के ज्यादातर लोग वाकिफ है।
निर्देशक रिची मेहता ने इसीलिए इस कहानी को दोबारा कहने के लिए कैमरा पहले से पता चीजों से थोड़ा दूर रखा है और ये दिखाने की कोशिश की है कि उस वक्त जो कुछ टीवी पर दिख रहा था उसके अलावा भी आसपास क्या हो रहा था। कहानी का सूत्रधार उन्होंने युवाओं को बनाया है। ये वे युवा हैं जिन्हें कभी सर्जिकल स्ट्राइक तो कभी मिशन शक्ति का शोर सुनाई देता है लेकिन धरातल पर क्या बदल रहा है, ये पीढ़ी इसकी तरफ भी टकटकी लगाए है।
बेव सीरीज हमारे सामाजिक तानेबाने पर भी तगड़े कटाक्ष करती है। अदाकारी के मामले में शेफाली शाह और राजेश तैलंग दोनों इस सीरीज के मजबूत स्तंभ की तरह काम करते हैं। ऐसी कहानियों में मनोरंजन नहीं होता, ये बस आपको भीतर तक हिलाकर रख देती हैं।