क्या है पूरा मामला?
पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित उस्ताद फैयाजुद्दीन वसीफुद्दीन डागर ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि ‘वीरा राजा वीरा’ गाने की धुन उनके पिता उस्ताद नासिर फैयाजुद्दीन डागर और चाचा उस्ताद नासिर जाहिरुद्दीन डागर द्वारा रचित ‘शिवा स्तुति’ से कॉपी की गई है। डागर ने दावा किया कि भले ही गाने के बोल अलग हैं, लेकिन इसका संगीतमय ढांचा, लय और बीट्स ‘शिवा स्तुति’ से पूरी तरह मिलते-जुलते हैं।
कोर्ट का सख्त आदेश
कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
गाने के क्रेडिट में अब स्पष्ट रूप से लिखा जाएगा कि यह दिवंगत उस्ताद नासिर फैयाजुद्दीन डागर और उस्ताद नासिर जाहिरुद्दीन डागर की ‘शिवा स्तुति’ पर आधारित रचना है। यह नया क्रेडिट सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन माध्यमों पर अपडेट किया जाएगा। रहमान और मद्रास टॉकीज को 2 करोड़ रुपये कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने होंगे।
साथ ही, डागर परिवार को दो लाख रुपये का हर्जाना देना होगा। कोर्ट ने साफ किया कि हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की मूल रचनाएं कॉपीराइट कानून के तहत संरक्षित हैं। अगर कोई रचना संगीतकार की अपनी है तो उसे पूर्ण कानूनी अधिकार मिलेगा।
डागर ब्रदर्स की विरासत
उस्ताद नासिर फैयाजुद्दीन और नासिर जाहिरुद्दीन डागर को ‘जूनियर डागर ब्रदर्स’ के नाम से जाना जाता है। वह हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की ध्रुपद शैली के दिग्गज थे। उनकी रचना ‘शिवा स्तुति’ उनकी कला का एक अनमोल नमूना है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि पहले इस गाने का श्रेय सिर्फ डागरवाणी परंपरा को दिया गया था, जो अपर्याप्त था। अब डागर बंधुओं के नाम स्पष्ट रूप से जोड़े जाएंगे। फिलहाल, एआर रहमान और मद्रास टॉकीज की ओर से इस फैसले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, कोर्ट ने साफ कर दिया कि डागर के काम को बिना उचित श्रेय के इस्तेमाल करना कॉपीराइट उल्लंघन है।