भुपेन हजारिका भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम से एक बहुमुखी प्रतिभा के गीतकार, संगीतकार और गायक थे। इसके अलावा वे असमिया भाषा के कवि, फिल्म निर्माता, लेखक और असम की संस्कृति और संगीत के अच्छे जानकार भी रहे थे।
'दिल हूम हूम करे' जैसे कालजयी गीत के रचनाकार और गायक भूपेन हजारिका भारत के ऐसे विलक्षण प्रतिभा वाले
फनकार थे जो अपने गीत खुद लिखते थे, संगीतबद्ध करते थे और गाते थे। उन्होंने कविता लेखन, पत्रकारिता, गायन, फिल्म निर्माण आदि अनेक क्षेत्रों में काम किया।
जन्म और शिक्षा
भूपेन हजारिका का जन्म 8 दिसंबर 1926 को असम के तिनसुकिया जिले की सदिया गांव में हुआ था। 13 साल की उम्र में मैट्रिक परीक्षा पास करने के बाद हजारिका आगे की पढ़ाई करने के लिए गोवाहाटी गए। 1946 में हजारिका ने बनारस हिंदु विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए किया।
बचपन में लिखा पहला गीत
बचपन में ही उन्होंने अपना पहला गीत लिखा और दस वर्ष की आयु में उसे गाया। हजारिका ने करीब 13 साल की आयु में तेजपुर से मैट्रिक की परीक्षा पास की। आगे की पढ़ाई के लिए वे गुवाहाटी गए। 1946 में हजारिका ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एम ए किया। इसके बाद पढ़ाई के लिए वे विदेश गए।
न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी से उन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की। असमी भाषा के अलावा हजारिका ने 1930 से 1990 के बीच कई बंगाली और हिंदी फिल्मों के लिए गीतकार, संगीतकार और गायक के तौर पर काम किया। उनकी लोकप्रिय हिंदी फिल्मों में लंबे समय की उनकी साथी कल्पना लाजमी के साथ की 'रुदाली', 'एक पल', 'दरमियां', 'दमन' और 'क्यों' शामिल हैं।
गायन के साथ लेखन व निर्देशन भी
भूपेन हजारिका ने अपने लेखन और गायन दोनों से ही भारतीय संस्कृति और संगीत को बहुत कुछ दिया। उन्होंने असम के लोकगीतों को एक यूनीवर्सल पहचान दी है। हिंदी फिल्म इंडस्टी में भी उनका योगदान कम नहीं रहा है। 'दिल हूम हूम करे' और 'ओ गंगा तू बहती है क्यों' जैसे गीत आज भी गाए और गुनगुनाए जा रहे हैं।
इसके अलावा भूपेन ने बंगला समेत कई अन्य भारतीय भाषाओं में गीत गाए हैं। उन्होंने फिल्म 'गांधी टू हिटलर' में महात्मा गांधी का पसंदीदा भजन 'वैष्णव जन' गाया था। भूपेन हजारिका ने 13 से अलग-अलग भाषाओं की 13 से अधिक फिल्मों का निर्देशन किया। 15 से अधिक फिल्मों के लिए गीत गाए और दस से अधिक फिल्मों के गीतों को कंपोज किया।
सम्मान और पद
भूपेन हजारिका को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कारों से नवाजा गया। उन्हें 1975 में बेस्ट म्यूजीशियन का अवॉर्ड मिला। 1987 में भूपेन हजारिका को संगीत नाटक अकाडमी अवॉर्ड से नवाजा गया। 1992 में हजारिका को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया। 1997 में उन्हें भारत सरकार पद्मश्री और 2001 में पद्मभूषण की उपाधि से सम्मानित किया गया।
हजारिका 1998 से 2003 तक हजारिका ने संगीत नाटक अकादमी के चेयरमैन के रूप में भी कार्य किया। इसके अलावा उन्हें अपनी फिल्मों 'शकुंतला', 'प्रतिध्वनि', और 'लोटीघोटी' के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार भी दिया गया। साल 1967 से 1972 के बीच असम विधानसभा के सदस्य रहे।
राजनीति की पारी
भूपेन हजारिका राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने 2004 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट से 2004 में गोवाहाटी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में हारने के बाद भूपेन राजनीति से धीरे-धीरे करके दूर होते गए। 5 नवंबर 2011 को मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भूपेन हजारिका का निधन हुआ। उस वक्त उनकी उम्र 85 वर्ष थी।