फिल्म का विषय जब दर्शकों को अपनी तरफ खींचने में विफल रहा तो टी सीरीज ने दांव लगाया है गुरु रंधावा पर। गाना लिखा भी खुद गुरु ने है और कंपोजीशन भी उन्हीं की। मतलब गाने का सारा दारोमदार एक ही कंधे पर रख छोड़ा गया है। गुरु अपने बनाए गानों से धमाल मचाते भी रहे हैं लेकिन पंजाबी पॉप के साथ दिक्कत यही है कि इसके गायक आते तो बड़े शोर शराबे के साथ हैं पर उनकी कामयाबी पानी के बुलबुले जैसी ही अक्सर साबित होती है।
गुरु रंधावा दिखते आकर्षक हैं। परदे पर एक्टिंग भी ठीक ठाक कर लेते हैं। लेकिन, उनके संगीत में पंजाब की वैसी महक नहीं है जैसे दलेर मेहंदी, गुरदास मान या यहां तक जस्सी के गानों में रही है। टी सीरीज ने उनको यो यो हनी सिंह की खाली पड़ी जगह भरने के लिए तैयार किया। लेकिन, इस गुब्बारे की हवा निकलने लगी है। वीडियो निर्देशक नितिन परमार ने गाने के वीडियो में थोड़ा नयापन लाने की कोशिश जरूर की है, लेकिन नयापन गाने में ही न हो तो म्यूजिक वीडियो भी क्या करेगा।