केआरके ने अपने बचाव में कही थी ये बात
याचिका में वाशु भगनानी ने ये भी दावा किया कि केआरके बिना किसी उचित कारण के उनके खिलाफ सुनियोजित बदनामी अभियान चला रहे। वहीं अपने बचाव में केआरके ने कहा था कि याचिका तुच्छ और गलत तथ्यों पर आधारित है। एक फिल्म समीक्षक के रूप में फिल्मों की समीक्षा करना और फिल्म उद्योग से जुड़े मामलों पर चर्चा करना उनका काम है। केआरके ने किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत टिप्पणी करने से इनकार किया।
अदालत ने माना वाशु भगनानी की निजिता का हुआ उल्लंधन
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने पाया कि केआरके के ट्वीट और बयान किसी न किसी तरह वाशु भगनानी की प्राइवेसी का उल्लंघन कर रहे हैं। अदालत ने माना कि वाशु भगनानी की साख और प्रतिष्ठा दांव पर है। केआरके को समीक्षा की आड़ में सार्वजनिक रूप से अपनी निजी राय व्यक्त करके इसे नुकसान पहुंचाने का कोई अधिकार नहीं है। इसलिए मुकदमे के फैसले तक इस तरह के काम पर रोक लगाने के कारण हैं।