15 मार्च को रिलीज हो रही फिल्म 'जॉली एलएलबी' पर लगने वाला ग्रहण टल गया है। वकीलों को इस फिल्म से आपत्ति है। उनका कहना है कि इस फिल्म में वकीलों के साथ कोर्ट की गलत इमेज पेश की गयी है। मेरठ के वकील इस मसले पर कोर्ट चले गए हैं। हालांकि कोर्ट ने फिल्म की रिलीज रोकने की मांग को खारिज कर दिया है।
सुभाष कपूर की फिल्म 'जॉली एलएलबी' को रोकने के लिए मेरठ के कुछ वकीलों कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनके अनुसार इस फिल्म में वकीलों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। 15 मार्च को रिलीज होने वाली फिल्म में मेरठ के एक वकील की कहानी है, जिसे एक जाने-माने वकील के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा लड़ना पड़ता है। फिल्म के एक दृश्य में मेरठ से आए एक वकील को कानून का ज्ञान न होने और गलत अंग्रेजी का प्रयोग करते हुए दिखाया गया है।
वकीलों के अनुसार फिल्म में व्यंग्यात्मक तरीके से भारतीय न्याय प्रणाली पर कटाक्ष किया गया है। फिल्म के ट्रेलर में लॉ की शब्दावली को गलत तरीके से बोला गया है। इस मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डी.मुरुगेशन और जस्टिस वी.के.जैन की बेंच ने कहा कि अभी सिर्फ फिल्म का ट्रेलर है और इस स्टेज पर यह तय करना मुश्किल है कि फिल्म में क्या कॉन्टेंट है। सिर्फ ट्रेलर के आधार पर फिल्म की रिलीज नहीं रोकी जा सकती है।