भारतीय सिनेमा के कम उम्र के प्रतिभाशाली फिल्मकार ताम्हाणे, मीरा नायर के बाद किसी यूरोपीय फिल्म महोत्सव की मुख्य श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करने वाले देश के पहले निर्देशक बन गए हैं। “द डिसाइपल”, सफलता की दहलीज पर पहुंचे शास्त्रीय संगीतज्ञों की दुनिया को दिखाती है। फिल्म में एक भारतीय संगीतकार को दिखाया गया है जो अपनी कला में शुद्धता लाने का प्रयास करता है क्योंकि वह अपने पिता और गुरु द्वारा महान कलाकारों की कहानियां सुनते हुए बड़ा हुआ है।
यह पहला मौका नहीं है जब चैतन्य की कोई फिल्म इस महोत्सव में प्रीमियर के लिए चुनी गई हो। इससे पहले उनके निर्देशन में बनी पहली फिल्म 'कोर्ट' ने भी इस फेस्टिवल में भाग लिया था और ओरिजोंती (Orizzonti) श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार भी जीता था।