भारत में सेंसरशिप की शुरुआत ब्रिटिश राज में ही हो गई थी। सन् 1918 में ब्रिटिश एक्ट की तर्ज पर सेंसरशिप की शुरुआत की गई। इसके जरिए फिल्मों की सेंसरशिप और लाइसेंसिंग की व्यवस्था की गई। 1920 में रिलीज फिल्म 'आर्फन ऑफ द स्टार्म' से भारत में सेंसरशिप के बाद फिल्में रिलीज होने की परंपरा शुरु हुई।