प्रतीकात्मक तस्वीर
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क्या और क्यों होता है सेंसर बोर्ड
भारत के संविधान में सभी को अभिव्यक्ति की आजादी का मौलिक अधिकार प्रदान किया गया है, लेकिन इसमें कई चीजों को विस्तार से भी बताया गया है, जो अभिव्यक्ति पर उचित प्रतिबंध की भी बात करता है। यही चीज फिल्मों पर भी लागू होती है, क्योंकि सिनेमा मास मीडिया का एक व्यापक माध्यम है, जिसके द्वारा देश से लेकर विदेश तक के लोगों तक विचारों, कहानी, कल्पनाओं का संचार होता है। ऐसे में सिनेमा पर कुछ भी प्रसारित करने से पहले बेहद सावधानी बरतनी आवश्यक होती है। फिल्म में क्या दिखाया जाए और क्या नहीं। यह तय करने के लिए एक संस्था बनाई गई है, जिसको कहा जाता है, सीबीएफसी या सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन। छोटे शब्दों में इसे ही सेंसर बोर्ड कहा जाता है। यानी यह कहना गलत नहीं होगा कि एक फिल्म निर्माता की सारी मेहनत एक संस्था के हाथ में होती है।