Censor Board member Vani Tripathi Tikoo
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मुंबई में चल रहे फिक्की फ्रेम्स के दूसरे दिन फिल्मों को सेंसर सर्टिफिकेट देने की प्रक्रिया, कश्मीर में शूटिंग और छोटे बजट की फिल्मों के बीते साल किए गए बड़े धमाल पर चर्चा हुई। फिल्म सेंसर बोर्ड की सदस्य वाणी त्रिपाठी ने कहा, ‘भारतीय सिनेमा में नए फिल्ममेकर्स की एक पूरी नई पीढ़ी आ चुकी है जिसे कहानियां कहने के लिए बनावटीपन की जरूरत नहीं होती। देश के अलग अलग ग्रामीण क्षेत्रों से आए ये फिल्ममेकर्स उन कहानियों को चुन रहे हैं, जो उनके करीब हैं।’
महिलाओं को वस्तु के रूप में परदे पर पेश करने के सवाल पर वाणी ने सख्त लहजा अपनाते हुए कहा, ‘फिल्मों में महिलाओं को वस्तु की तरह पेश करने के सेंसर बोर्ड का हर सदस्य सख्त खिलाफ है और हम ऐसी फिल्मों को पास नहीं होने देंगे।’ उन्होंने कहा कि फिल्मों का प्रमाणन एक सामाजिक प्रक्रिया है। फिक्की फ्रेम्स में इसके अलावा दिव्या दत्ता, नितिन कक्कड़ और सिद्धार्थ आनंद कुमार ने जम्मू कश्मीर में फिल्मों की शूटिंग को लेकर हुई चर्चा में हिस्सा लिया।
सबसे दिलचस्प चर्चा फिक्की फ्रेम्स में हुई छोटी फिल्मों के बड़े धमाल को लेकर। बधाई हो बनाने वाली कंपनी जंगली पिक्चर्स की प्रीति साहनी ने कहा कि बॉक्स ऑफिस की कामयाबी सिर्फ एक सूत्र पर निर्भर करती है और वह है दर्शकों की पसंद। दर्शकों की पसंद हिंदी फिल्मों को लेकर बदल रही है।
स्त्री, बधाई हो, अंधाधुन और सूरमा जैसी फिल्मों की कामयाबी यही बताती है। इस चर्चा में बधाई हो के निर्देशक अमित श्रमा, स्त्री के निर्माता राज निदिमोरू व कृष्णा डीके, सोनी पिक्चर्स इंडिया के एमडी विवेक कृष्णानी और वॉयकॉम 18 के सीओओ अजित अंधारे ने भी हिस्सा लिया।