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सेंसर बोर्ड की प्रमुख लीला सैमसन के इस्तीफे के पीछे कौन?

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सेंसर बोर्ड की प्रमुख लीला सैमसन के अपने पद से इस्तीफ़ा दे देने के बाद से फिल्म सेंसर बोर्ड पर पड़ने वाले राजनीतिक दबाव उजागर हो गए हैं।
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खबर है कि लीला सैमसन ने विवादित फिल्म मैसेंजर ऑफ गॉड को रिलीज की सरकारी मंजूरी पर यह कदम उठाया है। जबकि गृह मंत्रालय ने भी आशंका जताई थी कि फिल्म को देखने के बाद सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है।

ऐसे में बॉलीवुड में हर तरफ एक ही सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर विवादित फिल्म 'मैसेंजर ऑफ़ गॉड' को सरकारी मंजूरी दिलाने के पीछे कौन है? जबकि इस फिल्म पर रोक को लेकर, कई धार्मिक संगठन मोर्चा खोले हुए हैं। यह फिल्म इसी शुक्रवार को रिलीज होनी थी, पर बोर्ड ने फिल्म को सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था।
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सैमसन ने विवादित फिल्म को नहीं दिया था सर्टिफिकेट

सैमसन ने विवादित फ‌िल्म 'मैसेंजर ऑफ गॉड' को फ‌िल्म सर्टिफिकेशन एपेलेट ट्राईब्यूनल (एफसीएटी) से मंजूरी मिलने के तत्काल बाद ही इस्तीफा देने का फैसला ले लिया था। दूरदर्शन ने भी इस खबर की पुष्टि कर दी है। जबकि सैमसन अब तक कि सबसे तेजतर्रार अध्यक्ष मानी जा रहीं थीं।

बोर्ड की अध्यक्ष लीला सैमसन ने फिल्म को सर्टिफिकेशन अपीलेट ट्राइब्यूनल (एफसीएटी) के पास भेज दिया था, जिसके बाद यह पूरा घटनाक्रम घटित हुआ है। सैमसन ने यह फैसला सेंसर बोर्ड की पूरी टीम के साथ फिल्म देखने के बाद किया था।

सेंसर बोर्ड अध्यक्ष ने आहत होकर लिया फैसला

विवादित फ़िल्म 'मैसेंजर ऑफ़ गॉड' में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम सिंह मुख्य भूमिका में है। पहले फ‌िल्म पर सेंसर बोर्ड ने रोक लगाई थी लेकिन अब फ‌िल्म को रिलीज की अनुमति मिल गई है। लेकिन इस अनुमति से आहत होकर फिल्म सेंसर बोर्ड अध्यक्ष ने इस्तीफा देने का फैसला ले लिया है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार जब लीला सैमसन से पूछा गया कि क्या उन्हें एफसीएटी की मंजूरी के बारे में पता है तो उनका कहना था, 'मैंने ऐसा सुना है लेकिन लिखित तौर पर कुछ भी नहीं पता। फिर भी यह सेंट्रल बोर्ड ऑफ सर्टिफिकेशन का मजाक उड़ाना है। मेरा इस्तीफा पक्का है। मैंने सचिव (सूचना और प्रसारण मंत्रालय) को बता दिया है।'
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फिल्म से बिगड़ सकता है माहौल

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम की फिल्म मेसेंजर ऑफ गॉड (एमएसजी) को सर्टिफिकेट देने से मना करके, सेंसर बोर्ड ने कड़ा फैसला लिया था। इसका कारण फिल्म से धार्मिक भावनाओं के आहत होने का खतरा बताया गया था।

इससे पहले अकाल तख्त समेत कई सिख संगठनों ने राम-रहीम की इस फिल्म पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगाते हुए बैन लगाने की मांग की थी। वहीं गृह मंत्रालय ने भी आशंका जताई थी कि फिल्म को देखने के बाद सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है। इस फिल्म को लेकर अकाल तख्त, ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन व शिरोमणि अकाली दल-मान ने प्रतिबंध की मांग की थी।
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