अनुराग कश्यप अक्सर अपने तीखे बयानों के चलते सुर्खियों में रहते हैं। हाल ही में उन्होंने इस बात पर खुलकर अपनी राय रखी है कि भारत 2026 के कान फिल्म फेस्टिवल में किस तरह से हिस्सा ले रहा है। अनुराग कश्यप को 'ब्लैक फ्राइडे' और 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' जैसी अलग तरह की फिल्मों के निर्देशन के लिए जाना जाता है।
कान बना रेड कार्पेट तमाशा
फिल्म समीक्षक सुचरिता त्यागी से बात में अनुराग कश्यप ने कहा कि भारत में कान जैसे बड़े इवेंट को अब सिनेमा के लिए एक गंभीर मंच के बजाय, ज्यादातर एक 'रेड-कार्पेट तमाशे' के तौर पर देखा जाने लगा है। उनके मुताबिक कान का असली सार अक्सर ग्लैमर के शोर-शराबे में कहीं खो जाता है।
अनुराग कश्यप
- फोटो : एक्स
क्या है भारत की दिक्कत?
अनुराग कश्यप ने कहा 'भारत में कान को लेकर सबसे बड़ी समस्या और जुनून सिर्फ रेड कार्पेट पर चलने की है। असल में यह फेस्टिवल फिल्में देखने, फिल्म निर्माताओं से मिलने और डिस्ट्रीब्यूटरों से बातचीत करने को लेकर है। ऐसी बातचीत जो यह तय करती है कि सिनेमा का भविष्य कैसा होगा।
अनुराग कश्यप ने उठाया जरूरी सवाल
अनुराग कश्यप ने यह भी कहा कि भारत में लोगों का ध्यान इंडस्ट्री से जुड़ी सार्थक बातचीत के बजाय, ज्यादातर अपनी मौजूदगी दिखाने और पब्लिसिटी पाने पर ही टिका रहता है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या भारतीय सिनेमा सचमुच ऐसे वैश्विक मंचों पर सही लोगों को भेज रहा है? खासकर उन लोगों को, जो भारतीय फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद कर सकें।
उनके मुताबिक विदेशों में नेटवर्क या दर्शक बनाए बिना सिर्फ अपनी मौजूदगी का जश्न मनाने से, लंबे समय में भारतीय फिल्मों को कोई खास फायदा नहीं होता।
अनुराग कश्यप
- फोटो : सोशल मीडिया
फेस्टिवल में नजर क्यों नहीं आए अनुराग?
उन्होंने यह भी बताया कि कान फिल्म फेस्टिवल 2026 के दौरान, वे हर दिन कई फिल्में देखने के बावजूद, ज्यादा लाइमलाइट में न आकर सादगी से रहना ही पसंद करते हैं। जब उनसे पूछा गया कि वे फेस्टिवल में ज्यादा नजर क्यों नहीं आते, तो उन्होंने कहा 'हम लोग साइड से चले जाते हैं।'