करीब दो दशक पहले चंकी पांडे का नाम हर फिल्म प्रेमी की जुबान पर था। आग ही आग, विश्वात्मा और तेजाब जैसी फिल्मों में वे चमके। लेकिन फिर अचानक सहनायक की भूमिकाओं में दिखने लगे।
उनका कैरियर उतार-चढ़ावों से भरा है। चंकी नए अंदाज की एक पारी के साथ फिल्म ‘बुलैट राजा’ में आकर दर्शकों को चौंकाने को तैयार हैं। चंकी पांडे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के उन ऐक्टरों में हैं जिनके कैरियर का ग्राफ सिर्फ आसमान की ओर ही नहीं जाता। उसमें उतार भी हैं।
लेकिन नए उभार के साथ। 1990 के शुरुआती दौर में वह चमकदार ऐक्टर की तरह उभर रहे थे, लेकिन कुछ वर्षों में अचानक परिदृश्य से लुप्त हो गए।
एक नई पारी की तैयारी
फिर नए दशक के शुरुआती दिनों उनका नाम एकाएक बांग्लादेशी फिल्मों के सुपरस्टार के रूप में खबरों में छाया। जब वहां पारी जम गई तो वे संन्यासी की तरह सारा ठाठ छोड़ कर वापस बॉलीवुड में चले आए।
यहां कॉमेडी में रंग जमाने लगे। लेकिन इस दौर तक बॉलीवुड में पीढ़ियां बदल चुकी थीं और नए ऐक्टरों की पौध के बीच सफलता की सीढ़ियां चढ़ना आसान नहीं रह गया था। परंतु चंकी ने पांव जमाए रखे। यही कारण है कि आने वाले दिनों में वह एक बार फिर दर्शकों के दिलों में जगह बनाने में कामयाब होते नजर आ रहे हैं।
जल्द ही रिलीज होने वाली फिल्म ‘बुलैट राजा’ में चंकी दर्शकों को चौंकाने के लिए तैयार हैं। हाल के वर्षों में हल्की-फुल्की कॉमेडी करते दिखने वाले चंकी इस फिल्म में लल्लन तिवारी बने हैं।
फिल्म में टर्निंग पॉइंट जैसी जो घटनाएं होती हैं, उसकी जड़ में लल्लन ही हैं! वे राज खोलते हैं, ‘लल्लन के किरदार में इतना जहर है कि फिल्म के हीरो सैफ अली खान उसकी वजह से ही आगे जाकर बुलैट राजा बनते हैं!’
रोल मिला तो चौंक गए
वैसे फिलहाल खुद चंकी चौंके हुए हैं। कहते हैं, ‘मेरे पास जब तिग्मांशु धूलिया का फोन इस रोल के लिए आया तो मुझे विश्वास नहीं हुआ क्योंकि जिस तरह के रोल मैं फिल्मों में कर रहा था, उनकी जगह ‘पान सिंह तोमर’ जैसी फिल्म बनाने वाले डायरेक्टर की फिल्म में कैसे हो सकती है!’
चंकी ने तिग्मांशु से पूछा कि क्या वाकई वे उन्हें फिल्म में लेना चाहते हैं तो उन्होंने कहा कि सचमुच ऐसा है क्योंकि मुझे वह चेहरा चाहिए, जिसे देख कर कोई अनुमान न लगा सके कि इसका अगला कदम क्या होगा। यह अगले पल क्या करने वाला है। वाकई चंकी इस मामले में खरे उतरते हैं। उनके चेहरे और आंखों से आप पता नहीं लगा कि वह अगला एक्सप्रेशन क्या देने वाले हैं!
चंकी कैरियर में यू-टर्न के जिस मोड़ पर खड़े हैं, उसका पूरा श्रेय तिग्मांशु को देते हैं। कहते हैं, ‘मुझे लल्लन के किरदार में जान फूंकने के लिए अपनी ओर से विशेष प्रयास नहीं करने पड़े क्योंकि तिग्मांशु खुद शानदार ऐक्टर हैं और आपको सीन करके बता देते हैं।’
वैसे एक बात जरूर चंकी ने अपने किरदार में स्वयं जोड़ी। वह बोलते वक्त गुटखा चबाते नजर आएंगे। चंकी बताते हैं, ‘मैं देखता था कि यूपी में लोग गुटखा चबाते हुए बोलते हैं। मुझे यह इंट्रेस्टिंग लगा और इसे मैंने लल्लन के किरदार में जोड़ दिया। बाद में जब खुद को मैंने डबिंग के दौरान पर्दे पर देखा तो विश्वास ही नहीं हुआ कि मैं हूं।’
गिरगिट की तरह रंग बदलता है लल्लन
चंकी इन दिनों फिल्म के प्रोमो में छोटे पर्दे पर नजर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि दीवाली पर जब मैं पार्टियों में गया था तो विशाल भारद्वाज और अनुराग कश्यप जैसे डायरेक्टरों ने प्रोमो की तारीफ की और मेरे लुक को आकर्षित करने वाला बताया। चंकी कहते हैं, ‘मैं बहुत एक्साइटेड हूं।
अगर इन निर्देशकों को मेरा लुक और काम अच्छा लग रहा है तो निश्चित रूप से दर्शकों को भी पसंद आएगा।’
सवाल यह उठता है कि चंकी के रोल में ऐसा क्या है, जो उसे खास बनाता है? वह कहते हैं, ‘लल्लन तिवारी बहुत बड़े परिवार का आदमी है, लेकिन हरकतें उसकी उतनी ही नीची हैं। वह गिरगिट है। रंग बदलता रहता है।’
चंकी के अनुसार, ‘यूं समझिए कि एक जमाने में कन्हैयालाल और जीवन जैसे कलाकार जो पर्दे पर करते थे, मैंने भी कुछ उसी रास्ते पर आगे बढ़ने की कोशिश की है।’ उम्मीद करें की चंकी की इस पारी का रास्ता लंबा होगा।