अक्षय कुमार की 'जॉली एलएलबी-2' ने 100 करोड़ के क्लब में एंट्री कर ली है। फिल्म ने अब तक बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रूपये से ज्यादा का कारोबार कर लिया है। आपको बता दें कि फिल्म को रिलीज हुए 12 दिन हो चुके हैं और अब तक दर्शकों को ये फिल्म काफी पसंद आई है। फिल्म ने रिलीज के पहले दिन ही 13.20 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। इसके बाद वीकेंड तक इसने करीब 51 करोड़ रुपये की कमाई की थी। अब 12 दिनों बाद फिल्म ने 100.19 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया है।
वहीं राणा दग्गुबती की फिल्म 'द गाजी अटैक' ने बॉक्स ऑफिस पर अब तक 6.70 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया है। हालांकि फिल्म के हिंदी और तेलूगू वर्सन ने अब तक कुल 15.75 करोड़ रुपये की कमाई की है। बॉलीवुड ट्रेड एनालिस्ट तरण आर्दश के अनुसार फिल्म की कहानी थोड़ी हटकर है इसलिए दर्शक इसे पसंद कर रहे हैं। ये फिल्म आगे और अधिक बेहतर प्रदर्शन करेगी। फिलहाल अक्षय कुमार राणा दग्गुबाती से आगे नजर आ रहे हैं।
हिंदू-मुस्लिम विमर्श को उठाया
अक्षय कुमार और हुमा कुरैशी
साल 2016 से ये अक्षय कुमार की चौथी फिल्म है जिसने 100 करोड़ रुपये के क्लब में अपनी एंट्री कराई है। इससे पहले 'एयरलिफ्ट', 'हाउसफुल '3 और 'रुस्तम' ने भी 100 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया था।
कपूर ने आतंकवाद के नाम पर फर्जी एनकाउंटर और इस बहाने हिंदू-मुस्लिम विमर्श को उठाया है। वह कहते हैं कि यह सही नहीं कि इश्क और जंग में सब जायज है। इस तर्क से लड़कियों पर तेजाब फेंकने और सीमा पर सैनिकों का सिर काट लेने वालों को भी गलत नहीं कहा जा सकता। वह सही-गलत के बीच स्पष्ट चमकती रेखा खींचने की वकालत करते हैं। फिल्म को यूपी में शूट किया गया है और कुछ हिस्से खूबसूरती से उभरे हैं। अदालत में तीनों कलाकारों की नोंक-झोंक समेत इस जिज्ञासा से भी फिल्म देखी जा सकती है।
इतिहास को लेकर भावुक
'द गाजी अटैक'
अगर आप इतिहास, ऐतिहासिक कहानियों और युद्ध-फिल्मों में दिलचस्पी लेते हैं तो यह फिल्म रोमांचित करेगी। परंतु इसकी अपनी सीमाएं हैं। कथानक बेहद छोटा है। रोमांच के क्षण कम हैं। कई बातों और दृश्यों का दोहराव है। आप आसानी से समझ सकते हैं कि आगे क्या होगा। कुछ बातें और दृश्य तर्क की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। भले ही केके मेनन और अतुल कुलकर्णी प्रभावित करते हैं परंतु राणा डग्गुबाती को सैनिक के बजाय हीरो बनाने का मोह निर्देशक नहीं छोड़ पाए।
फिल्म को खूबसूरती से शूट किया गया है। इसे और दर्शनीय बनाने के लिए कंप्यूटर पर की गई कारीगरी भी बढ़िया है। 'द गाजी अटैक' आपको इतिहास को लेकर कुछ भावुक बनाती है क्योंकि कई बार तकनीकी वजहों से जांबाजों को उनका श्रेय नहीं मिलता। सत्ता की कुछ मजबूरियां भी होती हैं।