जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस पी के चव्हाण की खंडपीठ ने पिछले हफ्ते केंद्रीय विदेश मंत्रालय (MEA) को निर्देश दिया था कि वह कम से कम यह पता लगाएं कि बच्चे कहां हैं और उनके साथ कुछ संपर्क स्थापित करें। अदालत नाडियाडवाला द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सरकार को उनके नौ साल के बेटे और छह साल की बेटी की सुरक्षित वापसी की सुविधा के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।
बुधवार को अधिवक्ता आशीष चव्हाण ने उच्च न्यायालय को बताया कि सरकार बच्चों को ट्रैक करने का प्रयास कर रही है। नाडियाडवाला और विदेश मंत्रालय के प्रवासी भारतीय मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव के बीच 16 सितंबर को एक बैठक भी आयोजित हुई थी। उन्होंने बैठक के मिनट्स का एक पत्र भी प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया था कि चूंकि बच्चे कथित रूप से पाकिस्तान में हैं, जिसके साथ कोई पारस्परिक कानूनी सहायता संधि नहीं है, इसलिए भारत सरकार पाकिस्तान सरकार के सहयोग के बिना निर्माता की पत्नी और बच्चों का ठिकाना नहीं खोज सकती।
इसके अलावा आशीष चव्हाण ने कहा कि विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग को पत्र लिखकर बच्चों के ठिकाने के बारे में बताने का अनुरोध किया है और उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है। इस पर पीठ ने कहा कि वह सिर्फ प्रयासों से आश्वस्त नहीं है और आश्वासन चाहते हैं। न्यायमूर्ति डेरे ने कहा कि हम (अदालत) चाहते हैं कि मंत्रालय अपना 100 प्रतिशत दे। अगर हम खुद आश्वस्त नहीं हैं, तो याचिकाकर्ता (नाडियाडवाला) का क्या होगा। हमें आधा-अधूरा आश्वासन और जुबानी न दें। हम आपसे (एमईए) से जो सुनने की उम्मीद करते हैं, वह यह है कि आप बच्चों को वापस लाने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे। अब पीठ ने मामले को सुनवाई तीन सप्ताह के बाद की दी है।
बता दें कि मुश्ताक नाडियाडवाला ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उनके बच्चों को उनकी पत्नी मरियम चौधरी और उनके परिवार ने पाकिस्तान में अवैध रूप से हिरासत में रख रखा है। निर्माता ने दावा किया कि उनकी पत्नी ने भारत लौटने से इनकार कर दिया है और उन्हें छोड़ने का कोई भी उचित कारण बताने से भी इनकार कर दिया है। नाडियाडवाला ने साल 2012 में पाकिस्तान में मरियम से शादी की थी।