प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा पर हुए 21 दिन के लॉकडाउन के बाद लोग घरों में तो बैठ गए, लेकिन अब नौकरी पर ना जाने की वजह से उनकी कंपनियों ने तनख्वाह में कटौती शुरू कर दी है। बड़ी और छोटी कंपनियों से उठी कटौती की यह हवा अब उड़ते उड़ते सिनेमा की गलियों तक जा पहुंची है। खबर है कि फिल्म इंडस्ट्री में अब अभिनेता, निदेशकों और संगीतकारों के वेतन में कटौती की बात चल रही है।
हिंदी सिनेमा अपने बड़े बजट की फिल्मों के लिए बहुत मशहूर है। कोरोना की वजह से बंद हुए कारोबार की वजह से भविष्य में इसके निर्माताओं को बड़ी मुश्किलें झेलनी पड़ सकती है। निर्माताओं के संघ 'फिल्म एंड टेलीविजन प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया' के अध्यक्ष रह चुके मुकेश भट्ट कहते हैं, 'बात यहां अब नफा और नुकसान की नहीं है, बल्कि अपनी बात पर टिके रहने की है। यदि अभिनेता अपने वेतन में कटौती करना शुरू करते हैं, तो उसका पालन सभी करेंगे। महामारी के इस दौर में हमें साथ मिलकर लड़ने की जरूरत है।'
इस सारे विवाद की शुरुआत तब हुई जब तमिल फिल्म इंडस्ट्री के निर्माता जे सतीश कुमार ने कहा कि अभिनेता, निर्देशकों और संगीतकारों को अपने वेतन में से 30 फीसदी की कटौती करनी चाहिए, क्योंकि देश इस समय महामारी से जूझ रहा है। इसके बाद हर तरफ उनके वक्तव्य की चर्चाएं शुरू हो गईं। निर्देशक मोहित सूरी लॉकडाउन के बाद अपनी अगली फिल्म 'एक विलेन 2' की शूटिंग शुरू करने की फिराक में हैं। वे कहते हैं, 'अभी यहां पैसे की कटौती पर कोई बात नहीं हुई है। हम सब एक परिवार की तरह काम करते हैं। अगर यहां वेतन काटने की कोई बात आती है, तो इस पर भी हम कदम उठाएंगे। लेकिन लगता है कि परिवार में अब पक्षपात हो रहा है। यह बिल्कुल भी सही नहीं होगा कि निर्देशक और बाकी के कलाकार अपने पैसे में कटौती करवाएं।'