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आपने भी छिपकर देखी होंगी ये सी ग्रेड फिल्में

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बी ग्रेड फिल्मों का संसार बड़ा गहरा है। हम सब अपने आसपास सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों पर सजे इन फिल्मों के पोस्टर देखते हुए बड़े हुए हैं। कभी यहां कांति शाह के अंगूर दिखते हैं तो कभी शीला की जवानी।
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इन फिल्मों का व्यापार बहुत हद तक इन फिल्मों के पोस्टर और फिल्म के टाइटिल पर तय होता है। मन जानता है कि शीला की जवानी फिल्म में शीला नाम को कोई कैरेक्टर होगा ही नहीं। धोखा खाने की पूरी आशंका होने के बाद भी दर्शक इन फिल्मों की तरफ आकृष्ट होते हैं।

सिनेमाघर में कब घुसे और कब निकलें

बी ग्रेड फिल्‍मों की कहानी लगभग एक जैसी होती है। ऐसी फिल्‍म बहुतायत से बनाने वाले कांति शाह की फिल्मों को अगर गौर से देखें तो पाएंगे कि फिल्‍म के पात्र भी लगभग वैसे ही होते हैं।

बी ग्रेड फिल्म लगातार देखने वाले दर्शक इस बात का अंदाजा लगा लेते हैं कि उन्हें वह दृश्य कहां दिखेंगे जिसके लिए वह टिकट खरीद रहे हैं। यानी सिनेमाघर में कब घुसना है और कब निकलता है यह उन्हें पता होता है। गेटकीपर और साईकिल स्टैंड चलाने वाले लड़के से भी दोस्ती कर ली जाती है और वही हमें इशारों में संकेत दे देता है कि फिल्‍म में फिल्म कब है।

कांति शाह हैं इस सिनेमा के बड़े नाम

कांति शाह ऐसी ‌फिल्मों के बड़े नाम है। कांति शाह की एक फिल्‍म आई थी डुप्लीकेट शोले। इस शोले का कैनवास लगभग वही होता है जो असल शोले का है। अंतर बस इतना है कि यहां गब्बर सच में बसंत के साथ बलात्कार कर बैठते हैँ।

इन फिल्मों का बलात्कार अपराध की निगाह से नहीं बल्कि मजे के लिहाज से दिखाया जाता है। कांति शाह की एक और फिल्म अंगूर बहुत चर्चा में आई थी। विक्रमादित्य मोटवानी की फिल्‍म उड़ान में कांति शाह की इस फिल्‍म का लंबा जिक्र किया गया है।

कलाकार भी वैसे ही रहे हैं

आपको हैरत होगी अभिनेता धर्मेंद्र भी ऐसी कुछ बी और सी ग्रेड फिल्‍मों का हिस्सा बने हैं जहां पर सेमी न्यूडिटी दिखाई गई है। हालांकि धर्मेंद्र इन दृश्यों का हिस्सा नहीं बने।

धर्मेंद्र के अलावा कादर खान मिंक, सोनू वालिया, कश्मीरा शाह, मल्लिका, अनु अग्रवाल, डायना हेडेन, हेलेन, शीतल, नीलम, पूनम दासगुप्ता, शकीला जैसी अभिनेत्रियों भी इन फिल्‍मों का हिस्सा रहीं हैँ।

कांति शाह के अलावा मोहन भाखरी, विनोद तलवार, राजकुमार कोहली, हरिमोहन सिंह और जोगिंदर, किशन शाह, और सुरेश जैन सरीखे निर्माता-निर्देशकों ने बी ग्रेड सिनेमा में बहुत तरह के प्रयोग किए हैं।

नाम भी तरह-तरह के

इन फिल्‍मों के नाम किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित कर सकते हैं। जैसे 151 सहेलियां, बरसात में जवानी, शीला की जवानी, अंगूर, सावन में जवानी, साली से प्यार, भाभी लगे प्यारी, नया अनुभव, डुप्लीकेट शोले जैसी नाम वाली फिल्में दर्शकों का आकर्षित करती रही हैं।

इन फिल्मों का नामों का ही अपना संसार है। इनके नाम इतने एक जैसे रहते हैं कि कई बार लगता है कि वहीं फिल्‍में बार-बार आ रही हैँ।
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ब्लू फिल्‍मों की सीडी ने किया रिप्लेस

देश के बी और सी टाइप शहरों के सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर इन फिल्‍मों को दिखाने का एक माध्यम बनते रहे हैँ। पिछले दस साल में जैसे-जैसे सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर खत्म हुए ऐसी फिल्‍मों का बाजार भी तेजी से कम हुआ।

इन फिल्‍मों का रिप्लेस करने में ब्लू फिल्‍मों की सीडी की बड़ी भूमिका रही है। इंटरनेट पर आसानी से ब्लू फिल्में उपलब्‍ध होने के बाद इन फिल्मों का बाजार धीरे-धीरे गिरता गया।
 
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