ये है मामला
पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक 'ह्यूमन वेलफेयर क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी' नाम की इस संस्था ने 16 सितंबर 2016 से हरियाणा सहित कई राज्यों में अपने कारोबार की शुरुआत की। यह सोसाइटी मध्य प्रदेश के इंदौर में रजिस्टर्ड थी और बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम के तहत काम कर रही थी। सोसाइटी ने निवेशकों को फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) और आवर्ती जमा (आरडी) योजनाओं में निवेश करने का ऑफर दिया और उन्हें आकर्षक ब्याज दरों का लालच दिया।
250 से ज्यादा थीं शाखाएं
इसके बाद सोसाइटी ने मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) का मॉडल अपनाया और बड़े-बड़े इंसेंटिव का वादा करके लोगों से पैसे जुटाए। धीरे-धीरे सोसाइटी ने खुद को एक विश्वसनीय वित्तीय संस्थान के रूप में स्थापित कर लिया और निवेशकों को भरोसा दिलाया कि उनका पैसा सुरक्षित रहेगा। सोसाइटी से जुड़ा एक एजेंट विपुल ने जानकारी दी कि उसने खुद 1,000 से ज्यादा अकाउंट्स खोले थे, लेकिन इन खातों में से किसी को भी अब तक पैसा नहीं मिला है। इस सोसाइटी के पूरे प्रदेश में 250 से ज्यादा शाखाएं थीं और करीब 50 लाख लोग इससे जुड़े हुए थे। विपुल ने साझा किया कि एजेंटों के जरिए घर-घर जाकर निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। इस काम के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया जाता था। इसके अलावा, सोसाइटी ने होटलों में बड़े-बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया, जिनमें निवेशकों और एजेंटों को भरोसा दिलाया जाता था कि उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है।
इन धाराओं में केस दर्ज
विपुल के अनुसार सोसाइटी ने साल 2016 से 2023 तक नियमित रूप से निवेशकों को मैच्योरिटी राशि का भुगतान किया, लेकिन जैसे ही सोसाइटी का कारोबार बड़ा हुआ, इसके अधिकारी अपनी असली नीयत दिखाने लगे। पहले एजेंटों के इंसेंटिव रोके गए और फिर निवेशकों को उनकी मैच्योरिटी राशि भी नहीं दी जाने लगी। जब लोग अपनी जमा की गई राशि की मांग करने लगे तो सोसाइटी के अधिकारी सिस्टम अपग्रेडेशन का बहाना बनाते रहे। जब लोग दफ्तर पहुंचे तो वहां ताला लटका हुआ था और सभी कर्मचारी मौके से फरार हो गए थे। इसके बाद निवेशकों ने धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। श्रेयस तलपदे और आलोक नाथ समेत 13 लोगों पर पुलिस ने 316(2), 318(2), (4) बीएनएस में केस दर्ज कर लिया है।