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संजय दत्त: पांच मिनट का मजाक बना विवाद, बीजेपी एमएलसी बोले- पाकिस्तान या येरवडा जेल में शांति मिले

Mon, 05 Oct 2026 12:23 PM IST
गोधूलि श्रीवास्तव एंटरटेनमेंट डेस्क,अमर उजाला

सार

Sanjay Dutt Controversy: संजय दत्त ने शेखर सुमन के शो में किये गए एक कॉमेडी एक्ट ने विवाद खड़े कर दिए हैं। हालांकि एक्टर ने इस पर सफाई दे दी है। मगर बीजेपी एमएलसी परिणय फुके ने इस विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है।
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संजय दत्त - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त शेखर सुमन के टॉक शो 'शेखर टूनाइट' पर पहुंचे थे। जहां उनका एक मजाक दर्शकों को पसंद नहीं आया। इसके बाद इसने विवादों का रूप ले लिया। जानें क्या हुआ शो पर?

बीजेपी एमएलसी ने की निंदा 

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महाराष्ट्र के बीजेपी एमएलसी परिणय फुके ने संजय दत्त के इस बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने एएनआई से बातचीत में कहा, ‘संजय दत्त की सोच ठीक नहीं है उम्र का असर दिखने लगा है। उन्होंने कई शराब ब्रांड लॉन्च किए हैं, जिसका उन पर बुरा असर पड़ रहा होगा। शायद उन्हें पाकिस्तान या येरवडा जेल में शांति मिले अगर ऐसा है, तो उन्हें वहीं चले जाना चाहिए।’

संजय दत्त - फोटो : सोशल मीडिया

क्या है मामला? 

  • शेखर सुमन के टॉक शो 'शेखर टूनाइट' में गांधी जयंती के अवसर पर अभिनेता संजय दत्त मेहमान बनकर पहुंचे थे। 
  • संजय दत्त ने पांच मिनट का एक मजाकिया एक्ट किया। 
  • इस दौरान उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री मानकर खास मुन्ना भाई अंदाज में देश को संबोधित किया। 
  • इसके बाद उन्होंने देश की मौजूदा स्थिति पर भी अपनी राय साझा की। 
  • उन्होंने कहा कि उन्हें अब देश में शांति महसूस नहीं होती। 
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संजय दत्त - फोटो : सोशल मीडिया

आलोचना के बाद पेश की सफाई
संजय दत्त की कही इस बात ने सोशल मीडिया पर विवाद पैदा कर दिये। इसके बाद संजय ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने बताया कि ये टिप्पणियां पहले से लिखी हुई थीं और हास्यपूर्ण संदर्भ में कही गई थीं, साथ ही उन्होंने कहा कि उनका किसी को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था।  अभिनेता ने अपने बयान का कनेक्शन अपनी चर्चित फिल्म 'मुन्नाभाई' से जोड़ा। संजय दत्त ने  लिखा, 'इसके पीछे की भावना मुन्ना भाई जैसी फिल्मों में दिखाई गई हास्य और व्यंग्य की शैली के समान थी, विशेष रूप से ‘गांधीगिरी’ की उस सोच से प्रेरित थी, जिसका उद्देश्य प्रेम, एकजुटता और सद्भावना का संदेश देना था। दुर्भाग्यवश, मेरी बातों को उस मूल संदर्भ से अलग तरीके से समझा गया'।

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