कमल हसन तमिल फिल्मों के साथ हिंदी फिल्मों में भी उतना ही पसंद किए जाते हैं। उनको हिंदी फिल्मों में स्वीकार्यता सुपर हीरो रजनीकांत से भी ज्यादा मिली है। कमल हसन से फिल्म इंडस्ट्री में बतौर बाल कलाकार कदम रखा।
1959 को प्रदर्शित हुई फिल्म 'कलत्तूर कन्नम्मा' में दर्शकों ने इस बाल कलाकार को देखा। इस फ़िल्म में उनके साथ दिग्गज तमिल अभिनेता जेमिनी गणेशन थे। इस फिल्म के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता।
छह साल की उम्र से फिल्मों में
सात नवंबर, 1954 को जन्मे कमल हासन ने अभिनय की शुरूआत छह साल की उम्र से की थी। कमल हासन का जन्म तमिलनाडु के रामानाथ पुरम में हुआ था। उनके पिता डी. श्रीनिवासन और मां राजलक्ष्मी थीं। उनके पिता दक्षिण भारतीय पंडित परिवार से थे। कमल हासन के दो भाई और एक बहन भी हैं। उनके दो भाई चारु हासन और चंद्र हासन है और बहन नलिनी राघु है। उनके भाई चारू हसन भी एक फिल्म अभिनेता हैं। कमल हासन ने छह साल से ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। पहली ही फिल्म में उन्हें राष्ट्रीय अवॉर्ड से नवाजा गया।
बतौर अभिनेता बनी पहचान
बाल कलाकार के बाद जब उन्होंने दुबारा फिल्मों में आने को सोचा तो वह टेक्नीकल स्टाफ के रूप में काम करना चाहते थे पर उन्हें बतौर अभिनेता फिल्मों में काम करने का मौका मिला। 1973 में रिलीज हुई 'अरंगेत्रम' से उन्होंने अपने फिल्मी कॅरियर की विधिवत शुरूआत की। इस फिल्म का निर्देशन के. बालचन्द्रन ने किया था। मलयालम में उनकी पहली फिल्म साल 1974 में 'कन्याकुमारी' के नाम से आई।
इसी साल आई तमिल फिल्म 'अपूर्वा रागांगल' के लिए उन्हें पहली बार साउथ फिल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस फिल्म के लिए उन्हें साउथ का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया। 'अपूर्वा रागांगल' साउथ की एक बेहतरीन क्लासिकल फिल्म मानी जाती है। इस फिल्म में उनके साथ साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत भी थे।
एक्टर से सुपरस्टार तक का सफर
साल दर साल कमल हसन सफलता की सीढ़िया चढ़ते रहे। 1983 में प्रदर्शित हुई सागर 'सागर संगमम', 1987 में 'नायकन', 1988 में 'पुष्पक', 1989 में 'अपूर्व सहोदगल', 1992 में 'तेवर मगन', 1996 में 'इंडियन', 2000 में 'हे राम' और 2008 में दशावतारम वह फिल्में रहीं जिन्होंने कमल हसन को सुपरस्टार का दर्जा दिया। 'दशावतारम' फिल्म बहुत ही चर्चित फिल्म रही। इस फिल्म में कमल हसन ने दस अलग-अलग भूमिकाएं की थीं। कमल हसन ने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। कई फिल्मों के लिए गीत गाने के साथ कुछ फिल्मों का निर्देशन भी किया।
हिंदी फिल्मों में भी जमाया रुतबा
साउथ के जितने भी स्टार हुए हैं कमल हसन ऐसे पहले हैं जिन्हें हिंदी फिल्मों के दर्शकों ने सबसे ज्यादा स्वीकारा है। इसके पीछे सीधी वजह कमल हसन की अभिनय शैली है। साउथ फिल्मों के अन्य नायकों की तरह कमल हसन लार्जर दैन लाइफ वाली ऐक्टिंग नहीं करते। भूमिका हास्य की रही हो या संजीदा कमल हसन ने हमेशा अपने अभिनय ने लोगों का ध्यान खींचा। 1983 में रिलीज हुई फिल्म 'सदमा' के माध्यम से पहली बार कमल हसन ने हिंदी फिल्मों में गौर करने वाला काम किया था। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। इसके पहले 1981 में रिलीज हुई रोमांटिक कॉमेडी फिल्म एक-दूजे के लिए में भी कमल हसन की भूमिका को एक हीरो के रूप में नोटिस किया गया था। 1983 से लेकर 1985 तक कमल हसन ने एकसाथ नौ फिल्में कीं।
'जरा जी जिंदगी', 'करिश्मा', 'राज तिलक', 'यादगार', 'एक नई पहेली', 'देखा प्यार तुम्हारा', 'गिरफ्तार' , 'यह देश' और 'सागर' फिल्मों में सिर्फ 'सागर' की हिट साबित हो पाई। इसके बाद कमल हसन ने 1998 में 'चाची 420' में अपने गेटअप से लोगों को खूब हंसाया। यह सिचुवेशनल कॉमेडी फिल्म एक बड़ी हिट साबित हुई। इस फिल्म के लिए उन्हें एक बार फिर अवॉर्ड मिला। 2000 में चर्चित फिल्म 'हे राम' भी रिलीज हुई। इस फिल्म में रानी मुखर्जी के साथ उनके चुंबन दृश्य की चर्चा लंबे समय तक फिल्मी गलियारों में रही। 2005 में वह एक और कॉमेडी फिल्म 'मुंबई एक्सप्रेस' में दिखे। इस फिल्म को लिखने के साथ कमल हसन ने प्रोड्यूस भी किया था।
निजी जीवन के उतार-चढ़ाव
कमल हसन का नाम कई नायिकाओं के साथ जुड़ा। 70 के दशक में अभिनेत्री श्रीविद्या के साथ उनका अफेयर लंबे समय तक चला। कयासों को झुठलाते हुए 1978 में कमल हसन ने अपने से उम्र में बड़ी नृत्यांगना वाणी गणपति से शादी कर ली। करीब दस साल के बाद उनका रिश्ता टूट गया। इस रिश्ते की टूटने की वजह तमिल अभिनेत्री सारिका को बताया गया। यह बात सही साबित हुई। 1988 में उन्होंने सारिका से शादी कर ली। उनकी बड़ी बेटी श्रुति हसन भी फिल्मों से जुड़ चुकी हैं। छोटी बेटी अक्षर हसन भी जल्द ही फिल्मों में दिखेगी।