फिल्म निर्माताओं से सहमति लिए बिना हिंदी फिल्मों को ओटीटी पर दिखाने के एक बड़े रैकेट का मुंबई पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस सिलसिले में पुलिस ने शेमारू एंटरटेनमेंट समेत बड़ी निर्माता कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों की चोरी का मामला दर्ज किया है।
अंबोली पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआऱ में नामजद किए गए लोगों में शेमारू एंटरटेनमेंट के एमडी रमन हीरजी मारू और एमडी विनोद करनी और एक अन्य बड़ी निर्माता कंपनी के शीर्ष अधिकारी सुधांशु वत्स, अजित अंधारे शामिल हैं।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक इस साल की शुरुआत में फिल्म निर्माता सतीश टंडन ने इस बारे में शिकायत की थी। करीब पांच महीने तक चली जांच के बाद पुलिस को इस शिकायत की काफी सारी बातें पहली नजर में सच मिली हैं। टंडन का आरोप है कि पिछले कई साल से एक बड़ी निर्माता कंपनी ओटीटी वूट पर तमाम फिल्म निर्माताओं की फिल्में बिना इजाजत दिखा रही हैं और इनसे होने वाली कमाई को फिल्म निर्माताओं के साथ बांट भी नहीं रही है।
संजय दत्त को लेकर जंग आदि फिल्में बना चुके सतीश टंडन ने हालांकि अपनी शिकायत उक्त निर्माता कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ ही की थी लेकिन जांच के दौरान पता चला कि इस पूरे मामले में शेमारू एंटरटेनमेंट की भी मिलीभगत रही है। शेमारू के पास फिल्मों के वीडियो कैसेट बनने के दौर के तमाम सारे राइट्स हैं और पुलिस को पता चला है कि बड़े ओटीटी संचालकों को हिंदी व दूसरी भारतीय भाषाओं के डिजिटल फॉर्मेट इसी कंपनी ने मुहैया कराए हैं। ये जानकारी आने के बाद पुलिस ने शेमारू कंपनी को भी इस मामले में नामजद कर लिया है।