अरुण शिंदे का कहना है कि इस फिल्म के निर्माता रमेश थेटे ने पिछले साल नवंबर में उन्हें एक पुरानी पटकथा पर काम करने के लिए बुलाया था। अरुण ने बताया, 'मैं एक साथ कई चीजों पर काम कर रहा था इसलिए मैंने रमेश के साथ एसोसिएट निर्देशक और लेखक के रूप में इस फिल्म के लिए एक एग्रीमेंट बनवाया। हालांकि, जब मैंने रमेश से उस एग्रीमेंट की एक कॉपी मांगी तो वह बहाने बनाने लगे। इसके बावजूद मैं अगले दो महीने तक उस पटकथा पर काम करता रहा और अर्जुन रामपाल के आग्रह पर मैंने उस पटकथा में कई बदलाव भी किए। जब पटकथा पूरी हो गई तब इस फिल्म में रचनात्मक निर्देशक के रूप में आशु त्रिखा को लिया गया।'
अरुण का आरोप है कि आशु इस फिल्म के लेखक और निर्देशक दोनों ही बनना चाहते हैं। अरुण ने फिल्म के निर्माता रमेश से आशु के इस व्यवहार की शिकायत की तो खुद अरुण को ही फिल्म से बाहर कर दिया गया। अरुण ने बताया कि पूरे मामले को लेकर रमेश, आशु और अर्जुन रामपाल के बीच एक होटल में मीटिंग भी हुई लेकिन उस मीटिंग में अरुण को नहीं बुलाया गया। हालांकि, इस मामले में फिलहाल आशु चुप्पी साधे हुए हैं। उनका कहना है कि वह एक अंतरराष्ट्रीय अभियान से जुड़े हुए थे और उसके काम में व्यस्त थे। जल्दी ही वह इस मामले का संज्ञान लेंगे। अर्जुन रामपाल ने अभी तक इस बारे में कुछ कहा नहीं है।