फिल्मों की सफलता का पैमाना आपके लिए क्या है?
‘थामा’ की हाई ओपनिंग और ‘ड्रीम गर्ग 2’ का 100 करोड़ क्लब में शामिल होना, मैं इन दोनों बातों को सिर्फ बॉक्स ऑफिस नंबर्स की तरह नहीं देखता। कोविड के बाद थिएटर का पूरा सिस्टम बदल चुका है। ऐसे समय में इन फिल्मों का चलना मेरे लिए बहुत मायने रखता है। आज ऑडियंस को सबसे ज्यादा खींचने वाली चीज जिज्ञासा है। हमने यह भी देखा है कि बिना बड़े सुपरस्टार वाली फिल्में भी चली हैं। अच्छी कहानी अपने आप ही ऑडियंस खींचती है।
आप कई फ्रैंचाइजी फिल्मों का हिस्सा रहे हैं? इन फिल्मों के चयन की वजह क्या रही है?
मैंने कोई रणनीति बनाकर फ्रैंचाइजी फिल्मों पर काम नहीं किया। चाहे ‘बधाई हो’ हो या ‘ड्रीम गर्ल’ या फिर ‘शुभ मंगल..’, ये किसी मास्टर प्लान का हिस्सा नहीं थीं। मेरे लिए हमेशा स्क्रिप्ट ही सबसे अहम रही है। स्क्रिप्ट पसंद आने के बाद ही मैं इन फिल्मों से जुड़ा हूं।’
आप ऑडियंस को क्या नया दिखाना चाहते हैं?
कोविड के बाद लगातार 100 करोड़ क्लब में पहुंचने वाली फिल्मों को मैं सिर्फ नंबर की तरह नहीं देखता। बॉक्स ऑफिस की सफलता जरूरी है, क्योंकि यह ऑडियंस के भरोसे को दिखाती है। मेरी कोशिश यही रहती है कि हर बार ऑडियंस को कुछ ऐसा दूं, जो उन्होंने पहले न देखा हो।
अपने करियर के मौजूदा दौर और आने वाले काम को लेकर क्या आप संतुष्ट हैं?
साल 2026 में मैं कई तरह के किरदारों में नजर आऊंगा। मेरी हर फिल्म की तैयारी अलग रही है। कहीं ज्यादा शारीरिक तैयारी करनी पड़ी, तो कहीं भावनात्मक गहराई में जाना पड़ा। लेकिन अच्छी टीम के साथ काम करने से सब कुछ आसान लगा। अपनी पिछली फिल्मों की सफलता के बाद मैं इस दौर को संतोषजनक मानता हूं।
इस वक्त के भारतीय सिनेमा को लेकर आपका क्या नजरिया है?
आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो लगता है कि हम एक बहुत दिलचस्प दौर में हैं। पिछले कुछ वर्षों में हमने कई बेहतरीन फिल्में देखी हैं। चाहे ‘लापता लेडीज’ हो, ‘होमबाउंड’ हो या दूसरी फिल्में। इन फिल्मों ने नए कलाकारों को आगे आने का मौका दिया है। आज इंडस्ट्री में कई नए चेहरे जुड़ रहे हैं। मुझे उत्सुकता है कि आने वाले समय में वे क्या-क्या काम करेंगे? यह देखकर भी अच्छा लगता है कि भारतीय सिनेमा अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं रहा है। हमारा कंटेंट इंटरनेशनल प्लेटफाॅर्म तक पहुंच रहा है। बड़े फिल्म फेस्टिवल्स में जगह बना रहा है। वहां उसे सराहा भी जा रहा है। यह भारतीय सिनेमा का सुनहरा दौर है।’