फिल्म 'टोस्टर' में राजकुमार राव, सान्या मल्होत्रा के साथ अर्चना पूरन सिंह
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मैंने प्लास्टर छुपाकर सीन पूरे किए
अर्चना पूरन सिंह ने फ्रैक्चर के बाद की स्थिति के बारे में बात करते हुए कहा, ‘शूटिंग के आखिरी कुछ दिन बचे थे। शूटिंग का आखिरी दिन था और उसके बाद सिर्फ एक दिन की शूटिंग बाकी थी। तभी हाथ में फ्रैक्चर हो गया। अगर मेरी वजह से शूटिंग में गैप आ जाता तो यह बहुत लंबा हो जाता। फिर प्रोड्यूसर पर बोझ पड़ता। ऐसे में मैंने सोचा जो भी होगा, देखा जाएगा। मैंने हाथ नीचे रखकर शॉट्स किए। प्लास्टर छुपा दिया, लंबी स्लीव्स में और मिड शॉट्स में सीन दिए, जिससे फिल्म पूरी हो जाए। मैं प्रोड्यूसर राजकुमार की बहुत रेस्पेक्ट करती हूं। हालांकि मैं इस हादसे को अपनी याद में शामिल नहीं करना चाहती थी। मैं उस मजे को याद रखना चाहती हूं जो हमने सेट पर किया।’
मेरे लिए फिल्म 'टोस्टर' में अभिनय करना खास रहा
‘टोस्टर’ फिल्म की शूटिंग और अपने अनुभव के अलावा अर्चना ने अपने कॉमेडी शो को भी याद किया। वह कहती हैं, ‘मुझे पता है कि मैं एक कुर्सी (कॉमेडी शाे की जज) पर बैठती हूं, मैं सच बहुत लकी हूं, लेकिन सच्चाई यह भी है कि वहां मैं दूसरों के काम को सराहती हूं। अब उस कुर्सी से उठकर यहां मैं खुद काम कर रही हूं, उन लोगों के साथ काम कर रही हूं जिनके काम को मैं पहले भी सराहती रही हूं। इससे पहले किसी ने मुझे ऐसे नहीं देखा है। मैंने भी खुद को ऐसे नहीं देखा था। मैंने रोल किया और पूरी ईमानदारी से किया। लोग बहुत सरप्राइज होंगे और खुश भी होंगे। मुझे उम्मीद है कि जब ऑडियंस इस फिल्म को देखेगी तो हर कोई हमारे काम की सराहना करेगा।’
एक्साइटमेंट इतना था कि थकान नहीं होती थी
फिल्म ‘टोस्टर’ की शूटिंग के अनुभव को याद करते हुए अर्चना ने आगे कहा, ‘मैं सुबह 4 बजे उठती थी, 5 बजे की पहली फेरी पकड़ती थी और सेट पर पहुंचती थी। इतना उत्साह था, इतना एक्साइटमेंट था कि हर दिन लगता था आज फिर सेट पर जाना है, कुछ नया करना है। इतने अच्छे सीन थे कि हम खुद सोचते थे ये क्या सोचकर लिखे गए हैं। हम क्या परफॉर्म कर रहे हैं। कोई कुछ खा रहा है, कोई बात कर रहा है, कैमरे लगे हैं, हर तरफ एनर्जी है, सब बस अच्छा काम करने के लिए एक्साइटेड थे।’
‘टोस्टर’ यूनीक फिल्म है
अर्चना पूरन सिंह फिल्म ‘टोस्टर’ को बेहद खास फिल्म मानती हैं। वह कहती हैं, ‘मैंने फिल्म कर ली लेकिन अभी तक डिसाइड नहीं कर पा रही हूं कि मैंने किया क्या है। एक आदमी की कंजूसी और छोटी-छोटी बातों की वजह से एक टोस्टर को लेकर इतना अफरातफरी क्रिएट हो सकती है वो भी बहुत फनी, डार्क ह्यूमर में, ऐसा कभी सोचा नहीं था। कुल मिलाकर, मैंने इस फिल्म को बहुत एंज्वॉय किया।