'इस उत्पीडन के कई स्टेज होते हैं'
अपनी बातचीत में आगे अनुपमा परमेश्वरन ने कहा, ‘पहली श्रेणी में वे लोग आते हैं जो पीड़ित लोगों को जानते हैं, यानी वे परिवार और मित्र जिन्होंने किसी को पीड़ित होते देखा है। दूसरी श्रेणी में वे लोग आते हैं जिन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने यह शब्द सुना तो होगा, लेकिन इसके बारे में किसी तरह की कोई खोजबीन नहीं की होगी।
तीसरी श्रेणी में वे लोग आते हैं जो इसे जेंडर-आधारित बताते हैं और अनुमानों के आधार पर निगेटिव टिप्पणियां करते हैं। अगली श्रेणी में वे लोग आते हैं जिनसे मैं बात करना चाहती हूं, वे लोग जो इस स्थिति से गुजर चुके हैं लेकिन अभी तक इसे पहचान नहीं पाए हैं। यही सबसे ज्यादा खतरनाक है।’