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‘अस्सी मेरी सबसे कमर्शियल फिल्म’, अनुभव सिन्हा को नहीं होती बॉक्स ऑफिस नंबर्स की चिंता; बोले- मुद्दा है जरूरी

Fri, 20 Feb 2026 10:44 AM IST
आराध्य त्रिपाठी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Anubhav Sinha: अनुभव सिन्हा ने अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘अस्सी’ को लेकर बात की। जानिए क्यों बॉक्स ऑफिस नंबर्स के पीछे नहीं भागते अनुभव? फिल्म के सब्जेक्ट को लेकर कही क्या बात…
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अनुभव सिन्हा और तापसी पन्नू - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अनुभव सिन्हा की ‘अस्सी’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। देश में होने वाली दुष्कर्म की घटनाओं पर आधारित यह फिल्म अपनी घोषणा के बाद से ही चर्चाओं में हैं। हालांकि, जब इस फिल्म की घोषणा हुई थी, तो लोगों को लगा था कि अनुभव सिन्हा अपने गृहनगर वाराणसी के अस्सी घाट की कहानी लेकर आ रहे हैं। लेकिन जल्द ही पता चल गया कि कहानी एक संवेदनशील और जरूरी मुद्दे पर आधारित है। फिल्म को लेकर निर्देशक का कहना है कि कहानी का मूल विचार समाचार पत्रों की सुर्खियों से ही प्रेरित है।

लोगों को अब अपराध की गंभीरता से फर्क नहीं पड़ता

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स्क्रीन के साथ बातचीत में अनुभव सिन्हा ने फिल्म को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि हमारे चारों ओर सूचनाओं की भरमार के कारण, दर्शकों को किसी अपराध की गंभीरता का एहसास कराना कठिन होता जा रहा है। फिर चाहे वह बलात्कार जैसा जघन्य अपराध ही क्यों न हो। अब यह उतना मायने नहीं रखता कि आपकी आंखों के सामने क्या है, बल्कि यह मायने रखता है कि क्या आकर्षक है। आप उससे विचलित हो जाते हैं। इसलिए यह कोई गपशप या सनसनीखेज कहानी हो सकती है, क्योंकि यह अब सनसनीखेज नहीं रह गई है।

अस्सी फिल्म का ट्रेलर - फोटो : यूट्यूब ग्रैब

बॉक्स ऑफिस नंबर्स गपशप का विषय
बॉक्स ऑफिस नंबर्स और क्रिटिक्स की रेटिंग को लेकर निर्देशक का कहना है कि बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और समीक्षाओं में स्टार रेटिंग जैसी मामूली बातें भी चर्चा को एक संख्या तक सीमित कर देती हैं। जबकि असल मुद्दा चिंता का विषय होना चाहिए। ये आंकड़े गपशप का अच्छा जरिया हैं।

मुझे उम्मीद है कि दर्शक इसे समझ रहे होंगे। उन्हें यह समझ नहीं आता कि दुनिया भर में कुल कमाई, भारत में कुल कमाई और भारत में शुद्ध कमाई क्या होती है। उन्हें यह नहीं पता कि निर्माता को बताई गई रकम का 50% से भी कम मिलता है। 400 करोड़ रुपये, 700 करोड़ रुपये और 800 करोड़ रुपये जैसे आंकड़े तो बहुत ही महत्वाकांक्षी लगते हैं।

लेकिन मुझे उम्मीद है कि दर्शक इन आंकड़ों को गंभीरता से नहीं लेंगे। अगर मैं कर सकता तो मैं अपने आंकड़े घोषित नहीं करता, चाहे वे कितने भी अच्छे या बुरे क्यों न हों। लेकिन मैं इसे नहीं रोक सकता।

छोटे शहरों में भी देखी जाती हैं ‘अस्सी’ जैसी फिल्में
अनुभव सिन्हा का मानना है कि वो इस धारणा को तोड़ देंगे कि ‘अस्सी’ जैसी फिल्में जनता के लिए नहीं होती हैं। उन्होंने अपने जमीनी स्तर के अभियान 'चल सिनेमा चलें' के तहत भारत के 40 दूसरे दर्जे के शहरों का दौरा किया है। उनका कहना है कि यह एक गलत धारणा है।

उन्होंने कहा कि अब मैं कह सकता हूं कि दूसरे दर्जे के शहरों में इस तरह की फिल्में नहीं देखी जातीं। वे सिर्फ जवान या कांतारा जैसी फिल्में देखते हैं। बेशक उन्हें वो फिल्में ज्यादा पसंद आती हैं। लेकिन इन फिल्मों में भी उनकी काफी दिलचस्पी है।

दिक्कत ये थी कि हम उन्हें सही तरीके से फिल्म नहीं दिखा पा रहे थे। इसलिए इस बार मेरा पूरा अभियान घर-घर जाकर प्रचार करने पर केंद्रित है। पिछले दो महीनों से हम छोटे शहरों में फिल्म का प्रचार कर रहे हैं।

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अस्सी फिल्म का ट्रेलर - फोटो : यूट्यूब ग्रैब

बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करेगी ‘अस्सी’
अनुभव का कहना है कि अस्सी मेरे इस अवतार में बनी सबसे कमर्शियल फिल्म है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा प्रदर्शन करेगी क्योंकि यह बेहद नाटकीय और तेज गति वाली है। इसमें झूठ और चौंकाने वाले मोड़ हैं। अदालत का सीन दर्शकों के लिए हमेशा ही दिलचस्प होता है क्योंकि उन्हें बहस में भाग लेने का मौका मिलता है। वे न्यायाधीश का मूल्यांकन करते हैं।

कोर्टरूम के अंदर के माहौल से असल में हुआ वाकिफ
कोर्टरूम को लेकर अनुभव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में मेरी दो वरिष्ठ महिला वकील दोस्त हैं। हमने उन्हें कहानी सुनाई। उन्होंने कहा, ‘आप लोग इतनी गंदी कोर्ट शूटिंग करते हो। आपने कभी कोर्ट देखी है?’

मैंने कहा, ‘जी हां, सुप्रीम कोर्ट।’ तो उन्होंने कहा, ‘इसीलिए! आपने वो शांत, परिष्कृत कोर्टरूम देखा है जहां हर कोई चुपचाप सुनता रहता है। लेकिन फिल्म का मामला उस कोर्ट में नहीं जाएगा। अगले ही दिन मैंने नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट का दौरा किया और वहां का नजारा देखकर दंग रह गया।

मुझे एहसास हुआ कि मैंने फिल्म 'मुल्क' के कोर्टरूम सीन गलत तरीके से फिल्माए थे। यह कोर्टरूम बहुत भीड़भाड़ वाला और अव्यवस्थित है। मुझे कोर्टरूम की यह शीतलता बहुत पसंद आई। कोर्टरूम अपने काम में इतना मशगूल रहता है जबकि आपका जीवन इस पर निर्भर करता है।

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