आप जनता से सहानुभूति मांग रहे हैं
उन्होंने आगे दिलजीत को लेकर कहा, ‘आपने फिल्म में काम किया है और नियम साफ कहते हैं कि अगर सेंसर बोर्ड सर्टिफिकेट नहीं देता, तो आपको सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए। सबको पता है कि यह एक विवादित विषय है, और अब आप जनता से सहानुभूति मांग रहे हैं। खुद पर तरस खाने से क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट जाइए, रोने से क्या मिलेगा?’
मेरे लिए समाज में शांति ज्यादा जरूरी
अन्नू कपूर ने यह भी कहा कि जब CBFC राष्ट्रीय सुरक्षा या कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के आधार पर फिल्म को सर्टिफिकेट नहीं देता, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘क्या फिल्म रिलीज होना ज्यादा जरूरी है या देश में शांति बनाए रखना? क्या उससे ज्यादा जरूरी है कि सड़कों पर आगजनी हो, घर जलें और लोग परेशान हों? मेरे लिए समाज में शांति सबसे ज्यादा जरूरी है।’
फिल्म 'सतलुज' में दिलजीज दोसांझ
- फोटो : इंस्टाग्राम@diljitdosanjh
क्या है फिल्म की कहानी?
‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर आधारित है। उन्होंने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में कथित तौर पर हुए फर्जी अंतिम संस्कारों की जांच की थी। फिल्म में उनके संघर्ष और 1995 में उनके लापता होने तक की कहानी को दिखाया गया है।
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