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अमिताभ की कहानी उनके मेकअपमैन की जुबानी

Thu, 11 Oct 2012 04:10 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के मेकअपमैन दीपक सावंत का जुड़ाव अमिताभ के साथ फिल्म 'जंजीर' के वक्त से है। पिछले 38 सालों के इस रिश्ते के दौरान अमिताभ की सफलता और असफलता दोनों को दीपक ने भी जिया है। वे खुद कहते हैं कि अमिताभ ने उन्हें हमेशा अपने परिवार का हिस्सा माना है। वहीं अमिताभ का कहना है कि जिस इंसान ने उनके ऑन स्क्रीन लुक को हमेशा खास बनाया वह उनके लिए भी खास है। आइए सुनते हैं अमिताभ की कहानी उनके मेकअपमैन की जुबानी।
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अनकहा रिश्ता
अमित जी से मेरी मुलाकात 'जंजीर' की शूटिंग के दौरान हुई थी। उस समय मैं असिस्टेंट मेकअपमैन था। अपने गुरु के देखरेख में मेकअप करता था लेकिन जब मैंने अमित जी का मेकअप किया तो वह उन्हें बहुत पसंद आया और उन्होंने मुझे अपना निजी मेकअपमैन बना लिया। उसके बाद तो अमितजी और मेरा बीच एक अनकहा सा रिश्ता बन गया।

वक्त के पाबंद
अमित जी वक्त के बहुत पाबंद हैं। यह बात सभी जानते हैं लेकिन यह बहुत कम लोग जानते हैं कि वक्त को लेकर उनका अनुशासन उनसे जुड़े लोगों को भी अनुशासित बना देता है। वे हमेशा कहते हैं कि मेरे अंदर ऐसी कोई खासियत नहीं है जिसकी नकल उतारी जाये। लेकिन अगर कोई फिर भी मेरे रहन-सहन से कुछ सीख सकता है तो वह भी मेरी तरह वक्त की कीमत को समझे। यही वजह है कि मैं पिछले 38 सालों से अमितजी की हर शूटिंग स्पॉट पर उनसे आधे घंटे पहले मौजूद रहता हूं।
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महानायक की सादगी
वैसे हर कोई उनकी तरह वक्त का पाबंद नहीं है इसलिए उनकी सुबह की शूटिंग के वक्त अक्सर मैंने देखा है कि सेट पर अमित जी और मैं सबसे पहले पहुंच जाते थे और यूनिट वहां नहीं होती थी। पता चलता था कि सभी लोग रास्ते में हैं। ऐसे में वे उस वक्त शूटिंग स्टूडियो में मौजूद पेड़-पौधों को पानी देने में जुट जाते हैं तो कभी फ्लोर साफ करवाने लगते हैं। उस वक्त तो आपको देखकर लगेगा ही नहीं कि ये महानायक अमिताभ बच्चन हैं लेकिन उनकी यही सादगी उनकी खासियत है।

परफेक्शनिस्ट एक्टर
वे अपने काम में परफेक्शनिस्ट हैं और दूसरों को भी वे परफेक्शनिस्ट देखना चाहते हैं। उन्होंने मुझसे कई बार यह बात कही कि तुम अपने काम को परफेक्ट तरीके से करना पसंद करते हो। यह मैंने 'जंजीर' के वक्त ही नोटिस कर ली थी। जब तुमने मुझसे पूछने के बजाय कि आज क्या सीन है, स्क्रिप्ट में देखा कि क्या सीन है और उसी हिसाब से मेरा मेकअप किया। वाकई यह बात बहुत छोटी सी थी लेकिन अमितजी ने नोटिस की। आज भी मेरा यही रूटिंग है। मैं सेट पर पहले पहुंच जाता हूं और स्क्रिप्ट देखकर यह जान लेता हूं कि आज कौन सा सीन है और उस सीन में उनके लुक की क्या डिमांड है। मैं उसी के अनुसार उनका मेकअप करता हूं।

धैर्यवान इंसान
मेकअप करवाते हुए वह धैर्यपूर्वक बैठे रहते हैं। वह किसी की काम में दखलअंदाजी नहीं करते हैं इसलिए वह मेरे काम में भी नहीं करते हैं। उनकी यह धैर्यता ही है जो उनके व्यवहार को हमेशा शांत रखती है। परदे पर उनकी इमेज एंग्री यंगमैन की रही है लेकिन रियल लाइफ में अमित जी कभी भी गुस्सा नहीं होते हैं। अपने 38 साल के कैरियर में मैंने कभी भी उन्हें किसी पर चिल्लाते नहीं देखा है। उनके नाराज होने का अलग अंदाज है। वे गुस्सा होते हैं तो हमसे बात करना बंद कर देते हैं। जब वे हमसे बात नहीं करते तो हम समझ जाते हैं कि अमित जी हमसे नाराज हैं। फिर हम रिकॉल करते हैं और दोबारा उस गलती को नहीं दोहराते हैं।

अमित जी ही थे जिन्होंने मुझे निर्माता बनने के लिए न सिर्फ प्रोत्साहित किया बल्कि मेरी फिल्मों में बिना किसी फीस के काम भी किया। शोले के वक्त मैंने अमित जी का ऐसा मेकअप कर दिया था कि जया डर गयी थीं कि शायद अमितजी को सच में चोट आ गयी है और उनके चेहरे से खून निकल रहा है। तब से अमित जी मेरे मेकअप के और मुरीद हो गये।
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