मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने अपनी नाती अगस्त्य नंदा की आने वाली फिल्म ‘इक्कीस’ देखने के बाद भावनाएं साझा कीं। बिग बी फिल्म देखने के बाद काफी भावुक हो गए और उनकी फीलिंग्स साफ तौर पर छलक पड़ीं। उन्होंने इसे केवल एक नाना की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सिनेमा को गंभीरता से देखने वाले दर्शक की राय बताया।
फिल्म 'इक्कीस' पर क्या बोले अमिताभ?
'इक्कीस' भारतीय सेना के जांबाज अफसर सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के असाधारण जीवन पर आधारित एक बायोग्राफिकल वॉर ड्रामा है। यह फिल्म उस वीर सैनिक की कहानी कहती है, जिन्हें 1971 के भारत-पाक युद्ध में अद्भुत साहस दिखाने के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। खास बात यह है कि अरुण खेत्रपाल भारत के सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म का निर्देशन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक श्रीराम राघवन ने किया है और यह 1 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
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अमिताभ ने ब्लॉग के जरिए दिया रिव्यू
अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग के जरिए फिल्म देखने के अनुभव को साझा किया। उन्होंने लिखा कि अगस्त्य को स्क्रीन पर देखकर उनके मन में बीते वर्षों की कई यादें एक साथ उमड़ पड़ीं- जन्म से लेकर बड़े होने तक का सफर। लेकिन इन भावनाओं से अलग, उन्होंने अगस्त्य के अभिनय की भी खुलकर सराहना की। बिग बी के मुताबिक, अगस्त्य का अभिनय परिपक्व, सधा हुआ और पूरी तरह किरदार में ढला हुआ है। उन्होंने कहा कि अगस्त्य ने अरुण खेत्रपाल के किरदार को बिना किसी बनावट के निभाया है, जो सीधे दिल तक पहुंचता है।
बिग बी ने यह भी कहा कि जब अगस्त्य फ्रेम में होते हैं, तो दर्शक अनायास ही सिर्फ उन्हें देखने लगते हैं। उनके अनुसार, यह किसी पारिवारिक रिश्ते की वजह से कही गई बात नहीं है, बल्कि एक अनुभवी दर्शक की ईमानदार प्रतिक्रिया है। फिल्म की कहानी, लेखन और निर्देशन को भी उन्होंने लगभग बेदाग बताया और कहा कि फिल्म खत्म होने के बाद आंखें गर्व और खुशी के आंसुओं से भर जाती हैं।
सिमर भाटिया भी आएंगी नजर
फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही उत्सुकता है। अगस्त्य नंदा के साथ इसमें सिमर भाटिया भी नजर आएंगी, जो अभिनेता अक्षय कुमार की भांजी हैं और इस फिल्म से अभिनय की दुनिया में कदम रख रही हैं। इसके अलावा दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र को भी इस फिल्म में मरणोपरांत देखा जाएगा। बताया जाता है कि धर्मेंद्र की इच्छा थी कि इस फिल्म को भारत और पाकिस्तान- दोनों देशों के लोग देखें, ताकि युद्ध के पीछे छिपे मानवीय और भावनात्मक पहलू सामने आ सकें।