चंडीगढ़ में आयोजित हो रहे अमर उजाला संवाद कार्यक्रम आज सितारों का जमघट लगा हुआ है। चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल बिजनेस पार्क स्थित होटल हयात रेजेंसी में उद्योग, शिक्षा, खेल, कृषि, सिनेमा और कला क्षेत्र से जुड़ीं कई हस्तियां पहुंची। बॉलीवुड अभिनेता और गुरदासपुर से सांसद सनी देओल ने भी अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में शिरकत की। सनी देओल की आगामी फिल्म गदर 2 की अभिनेत्री अमीषा पटेल भी उनके साथ कार्यक्रम में पहुंचीं। h
मंच पर पहुंचे सनी देओल और अमीषा पटेल।
- फोटो : अमर उजाला
मीनाक्षी कंडवाल: जब 2001 में गदर आई थी, तब लोगों में इसे लेकर दीवानगी थी। पंजाब में इस फिल्म का प्रमोशन कितना अलग है?
सनी देओल: तारा सिंह है ही पंजाब से। हमें नहीं पता था कि जनता को यह फिल्म इतनी प्यारी लगेगी कि फिल्म ही गदर बन जाएगी। 22 साल हो गए हमारी फिल्म को। वह लोगों के दिल में थी। कौन आदमी नहीं चाहेगा कि उसे राजकुमारी मिल जाए। वही सपना लेकर तारा सिंह निकला था। बंटवारा हो गया, लेकिन प्यार उसकी ताकत थी। उसका परिवार बन गया। उसके परिवार को आपने पसंद किया। हर आदमी चाहता है कि परिवार एक रहे। परिवार ही हमारी दुनिया होती है। तारा सिंह ऐसा किरदार है जो परिवार के लिए अपनी जान दे देना है, लेकिन उस पर आंच नहीं आने देता। इसी वजह से हर आदमी-बच्चे-बुजुर्ग को यह फिल्म पसंद आई है। जब बताया गया कि गदर-2 बनानी है तो लगा कि ये कैसे कर सकते हैं। हमने सोचा कि पहली गदर से पंगा नहीं लेना चाहिए।
मंच पर पहुंचे सनी देओल और अमीषा पटेल।
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मीनाक्षी कंडवाल: ये विचार कब आया कि गदर-2 बनानी चाहिए?
सनी देओल: यह विचार लेखक-निर्देशक लेकर आए थे। मुझे इसकी बुनियाद अच्छी लगी और हमने इसे शुरू किया। कोरोना के वक्त इसकी तैयारियां शुरू हुईं। आज हम गदर-2 के साथ आप लोगों के सामने हैं। इससे हमें भरोसा मिला है कि लोग हमारे साथ हैं, तारा सिंह और सकीना के साथ हैं। मैं यही कह सकता हूं कि 1945-51 के वक्त था, यह दौर 1971 के आसपास का है।
सनी देओल
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मीनाक्षी कंडवाल: कैसे नन्ही आंखों में सपने पूरे होते हैं, जैसा सिमरत के साथ हुआ। नए अभिनेताओं का आपने कैसे हौसला बढ़ाया?
सनी देओल: पहले तो मुझे समझ नहीं आता कि मेरी उम्र क्या है। मेरी लोग इज्जत करते हैं तो अजीब सा लगता है। शुरू-शुरू में पता नहीं चला। फिर बॉर्डर जैसी फिल्में आईं तो लोग आकर पैर छूने लगे। तब समझ आया कि यह जिम्मेदारी है। ऐसी फिल्में करो जिससे परिवार के लोगों को अच्छी नसीहत मिले। देश के लिए कुछ कर सकें। अब तारा सिंह बन गया। लोगों को लगा कि तारा सिंह पता नहीं क्या होता है। हर आदमी हर तरह का किरदार, हर तरह का बदमाश भी होता है। जो अपने किरदार को काबू रखकर चल सके, वह सही बंदा होता है।
मंच पर पहुंचे सनी देओल और अमीषा पटेल।
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मीनाक्षी कंडवाल: पहली गदर का कलेक्शन कैसा था?
सनी देओल: तब टिकट सस्ते थे। तब आबादी 85 करोड़ थी। आज 140 करोड़ है। उस वक्त टिकटें ब्लैक होती थीं। प्रोड्यूसर्स के पास पैसे कम पहुंचते थे। तब हमने कोई बेंचमार्क नहीं रखा था, आज भी नहीं रखा। लोग किरदार को प्यार कर रहे हैं, तारा सिंह भी कॉमिक किरदारों की तरह है।
फिल्म की स्टार कास्ट पहुंची कार्यक्रम में
फिल्म गदर टू में खलनायक का रोल अदा करने वाले मनीष बाजवा, अभिनेता उत्कर्ष और अभिनेत्री सिमरन कौर भी पहुंची। अमरीश पुरी की जगह खलनायक के रोल पर मनीष ने कहा कि फिल्म में अशरफ अली सकीना के फादर हैं। मेरी अमरीश पुरी जी से कोई तुलना नहीं है। मैं उनके काम के आगे बच्चा हूं। जब मुझसे पूछा गया कि आप यह रोल कर पाएंगे तो मैंने कहा था कि मैं पूरी कोशिश करूंगा और सभी के आशीर्वाद से अच्छा किया। इस दौरान उन्होंने गदर का एक डायलॉग भी सुनाया।