अमर उजाला संवाद इस बार हरियाणा के गुरुग्राम में जारी। यहां 17 दिसंबर यानी आज बुधवार को खेल, सिनेमा और राजनीति जगत के तमाम दिग्गज मौजूद हैं। इन्हीं में से एक हैं अभिनेता अरशद वारसी। उन्होंने अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान वे सिनेमा और अपने करियर को लेकर बात करते दिखे। जानिए उनसे बातचीत के प्रमुख अंश:
दिल्ली के पर्यावरण पर की बात
अमर उजाला में पहुंचकर अरशद वारसी ने सबसे पहले दिल्ली के पर्यवारण का जिक्र किया। और पूछा, 'दिल्ली की एक्यूआई आपको कैसी लग रही है?' फिर मुस्कुराते हुए कहा, 'ठीक है यार'।
आपकी फिल्म तेरे मेरे सपने थी, तब वैनिटी नहीं होती थीं। 30 साल पहले के सिनेमा में क्या अलग था?
अरशद वारसी: बहुत कुछ अलग था। एक मासूमियत थी उस वक्त। मैं अपनी बात कह सकता हूं कि तब मजा आता था। अब बिजनेस का नजरिया काफी बढ़ गया है।
आपको कैसे मिली फिल्म?
मैंने पूरी कोशिश की थी फिल्म नहीं करने की। मेरे घर पर छोटा सा डिनर था। एक दोस्त आया था अपने दोस्त के साथ। मुझे उसने देखा कि मैं लोगों से कैसे मिल रहा हूं। दो दिन बाद उसने फोन किया और कहा मैं एक फिल्म डायरेक्ट कर रहा हूं, मैं चाहता हूं कि तुम ये फिल्म करो। मैंने कहा कि पार्टी दो दिन पहले हुई थी आपकी अभी तक उतरी नहीं है? क्यों मजाक कर रहे हो। उसने कहा कि नहीं सीरियस हूं। अपने फोटो तो भेज दो। मैंने बहुत ही साधारण सी फोटो भेजी। मैंने पोस्टकार्ड फोटो जया जी को भेज दी। मेरे पास फोन आया कि जया जी मिलने वाली हैं। वहां जाने के बाद उन्होंने न मेरा स्क्रीन टेस्ट लिया न कुछ और मुझे ओके कर दिया। मैं अब फिल्म नहीं करने की कोशिश कर रहा था। मैंने अपने डायरेक्टर को मैसेज भेज दिया कि सॉरी मेरे से नहीं होगा। किसी और को ले लो। मेरे डायरेक्टर ने कभी वो मैसेज चेक ही नहीं किया। इस तरह फिल्म करनी पड़ी। मेरा दिल कहता है कि आप फाइनली वही करते हैं, जो किस्मत में होता है। आप कितनी भी कोशिश करें'।
22 साल पहले आपका सर्किट नाम का एक कैरेक्टर आया। आज जब युवा पीढ़ी आपको सर्किट सर कहती है तो आपको लीजेंड जैसा फील होता है या सीनियर सिटिजन?
अरशद: लीजेंड वाली फीलिंग तो नहीं आती। हां, ये जरूर लगता है कि मैच्योर हो गया हूं। मैं दुबई में घूम रहा था पिछले दिनों, तो ग्रैंड पेरेंट्स ने कहा, 'सर्किट'। वहीं बच्चों ने कहा, 'गफूर'।
सर्किट का किरदार आपके लिए एक बड़ा मौका था?
वह एक बड़ा मौका था। यह जो रोल था पहले, यह बहुत ही निहायत घटिया रोल था। यह जो रोल था, इसे पहले हर एक्टर ने रिजेक्ट किया था। यह रोल वह था कि जो हीरो के पीछे खड़ा रहा है। मेरी किस्मत थी कि मुझे राजकुमार हिरानी जैसा डायरेक्टर मिला। मैंने उनसे कहा कि इस रोल में कुछ है तो नहीं, ऐसा नहीं है कि मेरा इससे कुछ हो जाएगा। मैं टीवी करूंगा या क्या पता नहीं। लेकिन, इस रोल को मैं एंजॉय करूंगा। वो तैयार हो गए। मुझे फ्रीडम मिल गई। फिर जो किरदार हुआ, सबको पता है।
एक वक्त ऐसा भी था कि आप डोर टू डोर कॉस्मेटिक भी बेचते थे?
अरशद: नहीं डोर टू डोर नहीं, लेकिन होटल में जाकर बेचता था। मैं जो बेचता था, उतना घटिया प्रोडक्ट किसी ने नहीं बनाया होगा। मैंने जो झूठ बोल-बोलकर बेचा है, बता नहीं सकता। मैं बोलता था कि केमिकल नहीं है, बहुत अच्छा है।
आखिरी बार आपने होटल से मॉइश्चराइजर बॉडी लोशन कब अपने बैग में डाला?
अरशद वारसी हंसते हुए: मैं अब पैसे कमाने लगा हूं। अब स्थिति ये है कि अब होटल वाले खुद मुझे देते हैं कि सर कुछ तो ले जाओ।
आपने दर्शकों को बहुत हंसाया है। आप कौन सा किरदार बार-बार निभाना चाहेंगे।
अरशद: लोगों को सर्किट पसंद है। मुझे इश्किया का बब्बन पसंद है। वह निहायत वाहियात इंसान है। मैं वैसा नहीं हूं असल जिंदगी में। वह किरदार बहुत दिलचस्प है।
कभी आपको सोशल मीडिया की ट्रोलिंग से डर लगता है?
अरशद: वो तो होती रहती है, मैं क्या करूं उसका। आप सबको खुश नहीं रखते।
ऐसा कोई टाइम है, जिसके बाद सोशल मीडिया नहीं खोलते?
अरशद: मैं ज्यादा तो सोशल मीडिया नहीं देखता हूं। कभी-कभी बैठे हैं, खाली हैं। कोई बोल दे कि यह वीडियो देख लो तो देख लिया।
आपकी ऐसी कोई गलती है, जिसे आप कहना चाहेंगे कि गलती हुई?
अरशद: नहीं गलती तो नहीं, लेकिन एक मिसअंडरस्टैंडिंग हो गई थी। प्रभास के बारे में पूछा गया था एक फिल्म को लेकर, तब मैंने कहा था कि क्या बना दिया।
आपके लिए सफलता क्या है?
अरशद: मेरे लिए सफलता ये है कि कोई मुझसे बात तो कर रहा है। लोग मेरे पास आते हैं और कहते हैं कि आपके साथ फोटो ले लूं, मैं कहता हूं प्लीज ले लो। मेरे लिए अपने परिवार के साथ वक्त बिताना सक्सेस है। आपको कोई चीज चाहिए और वह मिल गई तो फिर कहीं तो रुक जाना चाहिए। आपकी लालसा बढ़ती गई तो फिर वह आपको बीमार बना सकता है। मैंने सोचा था कि मुझे घर चाहिए, गोवा में घर चाहिए और लेक के पास चाहिए। मुझे ये सब चीजें मिल गईं। आज तक कभी काम के लिए कॉल नहीं किया। आज तक कभी ऑडिशन नहीं दिया। मेरे पास वही किरदार आते हैं जो सभी ने रिजेक्ट कर चुके होते हैं। जॉलीएलएलबी भी सबने रिजेक्ट कर दी थी, तब मेरे पास आई थी।
आपको किस तरह की कॉमेडी पसंद है?
मुझे हल्की कॉमेडी पसंद है। मुझे राजकुमार हिरानी की कॉमेडी पसंद है।
आप अच्छे कलाकार और अच्छे इंसान, अच्छा सेंस ऑफ ह्यूमर, अच्छे हसबैंड..., तो क्या आपकी पत्नी इतने सफल इंसान को डांटती है?
अरशद: किसी की दुखती रग पर इस तरह हाथ नहीं रखते यार। थोड़ा सोचो। वो, पहली बात तो मेरे घर में मेरी कोई वैल्यू नहीं है। मुन्नाभाई जब मैंने की तो सभी जगह खूब हंगामा हो गया। मेरे बेटे का बर्थडे था। एक दोस्त आया उसका। बोला- सर्किंट..सर्किट.. और मेरा बेटा पूछ रहा है कि ये सर्किट कौन है? तब महसूस हुआ कि घर की मुर्गी दाल बराबर।
आपने दर्शकों को बहुत हंसाया है। आप कौन सा किरदार बार-बार निभाना चाहेंगे।
अरशद: लोगों को सर्किट पसंद है। मुझे इश्किया का बब्बन पसंद है। वह निहायत वाहियात इंसान है। मैं वैसा नहीं हूं असल जिंदगी में। वह किरदार बहुत दिलचस्प है।