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Bandaa: सिनेमाघरों के साथ ही 'बंदा' का अब साउथ में भी होगा धमाका, तमिल और तेलुगू में इस दिन होगी रिलीज

Sat, 03 Jun 2023 03:46 PM IST
दीक्षा पाठक एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

सिर्फ एक ही बंदा काफी है फिल्म को जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना है, लेकिन अब इस प्लान में कुछ और कड़ियां जोड़ी गई हैं। बताया जा रहा है कि यह फिल्म तमिल और तेलुगू भाषा में भी रिलीज की जाएगी। आइए आपको बताते हैं कि यह फिल्म ग्लोबली कब रिलीज होगी। 
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सिर्फ एक ही बंदा काफी है - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मनोज बाजपेयी अभिनीत 'सिर्फ एक ही बंदा काफी है' फिल्म जी5 पर लगातार धूम मचा रही है। अपूर्व सिंह कार्की के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म को लगातार दर्शकों का बेहतरीन रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसके मद्देनजर फिल्म से बड़ा धमाका करने की तैयारी की जा रही है। दरअसल, सिर्फ एक ही बंदा काफी है फिल्म को जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना है, लेकिन अब इस प्लान में कुछ और कड़ियां जोड़ी गई हैं। बताया जा रहा है कि यह फिल्म तमिल और तेलुगू भाषा में भी रिलीज की जाएगी। आइए आपको बताते हैं कि यह फिल्म ग्लोबली कब रिलीज होगी। 

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25 सिनेमाघरों में हो चुकी रिलीज
गौरतलब है कि 'सिर्फ एक ही बंदा काफी है' फिल्म शुक्रवार यानी 2 जून को छोटे शहरों के 25 सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। अब इसे दक्षिण भारतीय दर्शकों के लिए रिलीज करने की तैयारी चल रही है। इसके मद्देनजर फिल्म का तमिल और तेलुगू वर्जन भी रिलीज किया जाएगा। इसका ग्लोबल प्रीमियर जी5 पर 7 जून को होगा।

 

जी5 पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली फिल्म बनी 'बंदा'
बता दें कि जी5 पर रिलीज होने के बाद से ही 'सिर्फ एक ही बंदा काफी है' फिल्म सुर्खियों में है। आलम यह है कि पिछले एक साल के दौरान यह जी5 पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली फिल्म बन चुकी है। इसे देखते हुए निर्माता और निर्देशक काफी उत्साहित हैं और फिल्म को दूसरी भाषाओं में भी रिलीज करने की तैयारी कर चुके हैं। 

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यह है फिल्म की कहानी
गौरतलब है कि यह फिल्म वकील पीसी सोलंकी की जिंदगी के सबसे बड़े केस पर आधारित है, जिसमें उन्होंने एक नाबालिग लड़की को इंसाफ दिलाया था। यह केस उन्होंने खुद को ईश्वर का दर्जा देने वाले एक साधु के खिलाफ लड़ा था। केस की सुनवाई के दौरान पीसी सोलंकी, उनके परिवार और मुख्य गवाहों को जान से मारने की धमकी तक मिली थी, लेकिन उन्होंने किसी की परवाह नहीं की। एक आम आदमी की आत्मशक्ति और साधु की ताकत के बीच यह लड़ाई करीब पांच साल तक चली थी। उस दौरान पीसी सोलंकी ने देश के नामचीन वकीलों का सामना करके यह साबित कर दिया था कि कानून तमाम साधु-महात्मा और धर्म से ऊपर है।
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