अक्षय कुमार हाल के वर्षों में ऐसे सितारे के रूप में उभरे हैं जिसका बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड शत-प्रतिशत है। लगातार इमेज बदलने वाले अक्षय इन दिनों अपनी देशभक्ति के जज्बे वाली फिल्मों के लिए चर्चित हैं। उनकी फिल्म रुस्तम रिलीज के लिए तैयार है। अक्षय सोमवार को इस फिल्म के लिए मीडिया से रू-ब-रू हुए और बातचीत की।
विज्ञापन
फिल्म में आप देशभक्त हैं, पत्नी से प्यार करते हैं और एक शख्स की हत्या का मुकदमा भी आप पर चल रहा है। कई पहलू हैं। कितना मुश्किल होता है ऐसा रोल?
ऐक्टर के तौर पर ऐसे रोल करना मेरे लिए मुश्किल नहीं होता। यह स्क्रीनप्ले लिखने वाले के लिए कठिन होता है। मुझे तो सिर्फ ऐक्ट करना होता है।
इस फिल्म को हां कहने की कोई खास वजह?
कहानी और स्क्रिप्ट। हमने कई फिल्मों में देखा कि रिश्तों में आदमी फिसल जाता है और बीवी उसे माफ करती है। परंतु ऐसा कहीं नहीं दिखाया कि पत्नी फिसल जाए रिश्ते में और वह वापस आना चाहती है। तब क्या होता है? एक नई चीज मुझे नजर आई और लगा कि इसे करना चाहिए।
रुस्तम बहुचर्चित नानावटी केस (1959) पर आधारित है। पहले भी दो फिल्में (ये रास्ते हैं प्यार के, 1963/अचानक, 1973) इस केस पर बन चुकी हैं। आपकी फिल्म किस तरह से अलग है?
विज्ञापन
वह फिल्में एक ही लाइन पर थीं। हमारी फिल्म में प्यार-मर्डर के साथ देशभक्ति और कई चीजें हैं। फिल्म में चार अलग-अलग जगहों पर घटी सच्ची घटनाओं और उनके मुकदमों के तथ्यों को लेकर यह एक कहानी बनाई गई है।
मैं अपनी इमेज बदलता रहा हूं
आप पर्दे पर तीनों (जल, थल, वायु) सेनाओं के अधिकारियों की भूमिका निभा चुके हैं। देशभक्ति से जुड़ी कई फिल्में आपके नाम हैं। क्या आप मानते हैं कि आप नए जमाने के मनोज कुमार हैं!
मनोज कुमार ने कई महान फिल्में की हैं। इसलिए मेरी उनसे कोई तुलना नहीं है। उनसे तुलना करना गलत होगा क्योंकि मुझे नहीं लगता कि उन्होंने हाउसफुल थ्री की होगी, ढिशुम की होगी। सिर्फ देशभक्ति फिल्मों से जोड़ कर आप मुझे एक खांचे में टैग कर देंगे जबकि मैं अपनी इमेज बदलता रहा हूं। मैंने ऐक्शन फिल्में की, रोमांटिक की, कॉमेडी की।
आप जॉली एलएलबी पार्ट 2 कर रहे हैं। हाल में अरशद वारसी ने कहा कि आप स्टार हैं। इसलिए दर्शक फिल्म देखने के लिए सिनेमाहॉल में जाएंगे। आप क्या कहेंगे?
फिल्मों में ऐसा होता है। जैसे मेरी फिल्म थी, वेलकम। आगे कोई और कर गया। हेरा-फेरी सीरीज में आगे दूसरे ऐक्टर आ गए हैं। इसका यही मतलब है कि किसी एक चीज पर किसी का पैदाइशी अधिकार नहीं होता
सीक्वल फिल्मों में अक्सर पहली फिल्म के सितारे की छाप होती है। नए ऐक्टर को उससे बेहतर करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है!
हां तो मैं मेहनत ज्यादा कर लूंगा। मैं समझता हूं कि मुझे जो भी किरदार दिया गया है, उसे अपने हिसाब से खेलना है। किसी और की नकल नहीं करनी है। जब मैं जॉली एलएलबी करूंगा तो मेरे तरह से करूंगा। जैसे मैंने राउडी राठौड़ की, तो वह रोल साउथ में मुझसे पहले रवि तेजा निभा चुके थे। उन्होंने अपने ढंग से किया था। अगर में उनको देख कर वैसा ही करूं तो यह गलत होगा। हिंदी के बाद यह फिल्म बांग्ला में बनी तो वहां के ऐक्टर ने उसके हिसाब से किया।
फिल्म चलेगी तभी मेरी कमाई होगी
अपने करिअर और सफलता को किस तरह देखते हैं?
फिल्मों में मैं संयोग से आया और जितना कुछ इससे मिला, उसे देखते हुए कोई शिकायत नहीं कर सकता। जहां तक सफलता की बात है तो मुझे लगता है कि यह आज है कल नहीं।
आपकी फैन फॉलोइंग खान तिकड़ी से कम नहीं। फिर क्या कारण है कि आपकी फिल्में 200-400 करोड़ तक नहीं पहुंचतीं?
क्योंकि मैं साल में चार फिल्मों में आता हूं। जैसे रुस्तम की बात करें। इसकी मेकिंग कॉस्ट ही 26 करोड़ है। बाकी पब्लिसिटी-एडवर्टाइजिंग का खर्चा है। मैं प्रोड्यूसर हूं। कीमत और खर्च के ऊपर जो कमाई होगी, वह मेरी होगी। फिल्म चलेगी तो मुझे मिलेगा। कम चलेगी तो कम मिलेगा। लेकिन फिल्म फ्लॉप नहीं हो सकती। मेरे सोचने और काम करने का ढंग यही है। यही सोच रखूंगा तो मैं तीन से चार फिल्म कर पाऊंगा वर्ना नहीं कर सकूंगा।
ऐसा नहीं लगता कि आपके दर्शक बंटे हुए हैं? हाउसफुल 3 जैसी फिल्मों के अलग और स्पेशल 26 तथा बेबी जैसी फिल्मों के अलग?
बात सही है लेकिन इनके बारे में पक्का नहीं कहा जा सकता। अभी रुस्तम की ऑडियंस अलग होगी। परंतु मैं उम्मीद करता हूं कि हाउसफुल 3 पसंद करने वाले कुछ दर्शक इसे भी देखेंगे। असल में इस तरह की फिल्मों का प्रॉपर मार्केट हमारे यहां नहीं है। मैं आपको बताऊं कि स्पेशल 26 ने 85 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। बेबी ने 92 का बिजनेस किया, एयरलिफ्ट ने 127 किया। यह मार्केट बढ़ रहा है। लोगों की ऐसी फिल्मों में रुचि बढ़ रही है जो मनोरंजक ढंग से उन्हें शिक्षित करे। मेरे ओ माई गॉड करने के बाद जाने कितने लोगों ने मंदिरों में दूध और तेल चढ़ाना बंद कर दिया। रुस्तम के बारे में मैं कह सकता हूं कई तलाक होने से बच जाएंगे। फिल्म पति-पत्नी को बताएगी कि मुश्किल हाल में वे कैसे एक-दूसरे का साथ निभा सकते हैं।
जिनके अपने घर शीशे के हों, वो दूसरों के घरों पर...
हाल में नसीरूद्दीन शाह ने राजेश खन्ना के बारे में लोगों को नाराज करने वाली टिप्पणी की। किसी कलाकार का दूसरे के बारे में ऐसा कहना, आप कितना सही मानते हैं?
मैं पिछले 25 साल से इस इंडस्ट्री में हूं और मैंने कभी किसी के बारे में कुछ नहीं कहा। कहते हैं ना कि जिनके अपने घर शीशे के हों उन्हें दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए। मेरा विश्वास इसमें है कि हमें अपने काम से काम रखना चाहिए। मैं किसी पर कुछ कहने वाला कौन होता हूं? हालांकि मुझे लगता है कि सब अपने अंदाज में बात करते हैं और उन्हें इसका हक भी है। वैसे नसीर साब ने बहुत ही गरिमामय ढंग से माफी मांग ली है और बात खत्म हो गई।