‘भोला’ के मेकर्स ने इस आधार पर दी चुनौती
इस मामले पर ‘भोला’ के मेकर्स ने न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि विवाद का निपटारा कहीं और किया जाना चाहिए। इसके बाद न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की अध्यक्षता वाली सिंगल बेंच ने क्या बॉम्बे उच्च न्यायालय को इस मामले की सुनवाई करने का अधिकार है? इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
‘कैथी’ के मेकर्स ने लगाए ये आरोप
ड्रीम वॉरियर पिक्चर्स का कहना है कि उन्होंने अक्तूबर 2019 में ‘कैथी’ का निर्माण और रिलीज किया था। उनका रीमेक अधिकारों सहित फिल्म की इटलेक्चुअल प्रॉपर्टी पर पूरा अधिकार है। बाद में कंपनी ने हिंदी वर्जन को लेकर कई समझौते किए। इनकी शुरुआत 2020 की में रिलायंस ग्रुप की एक इकाई के साथ सहयोग से हुई।
फिर 29 मार्च, 2023 को ड्रीम वॉरियर और रिलायंस एंटरटेनमेंट स्टूडियोज के बीच डील हुई, जिसके तहत ‘भोला’ को हिंदी रीमेक के राइट्स दिए गए। इस डील के आधार पर ड्रीम वॉरियर का दावा है कि उसे किश्तों में एक निश्चित रकम प्राप्त होनी थी। साथ ही फिल्म के प्रदर्शन से जुड़ी अतिरिक्त आय भी मिलनी थी। हालांकि, आरोप है कि अप्रैल 2022 में केवल 1 करोड़ रुपये और जीएसटी का प्रारंभिक भुगतान ही किया गया था।
नए समझौते के बाद नहीं मिला पैसा
30 मार्च 2023 को ‘भोला’ की रिलीज के बाद 1 अप्रैल 2023 को ड्रीम वॉरियर, रिलायंस और अजय देवगन एफफिल्म्स एलएलपी के बीच एक और समझौता हुआ। इस समझौते के तहत तीनों पक्षों को रीमेक के राइट्स की जॉइंट ओनरशिप दी गई। जबकि उपयोग के अधिकार रिलायंस के पास रहे।
ड्रीम वॉरियर का दावा है कि अप्रैल और मई 2023 में ड्यू पेमेंट कभी नहीं किए गए। अगले दो साल में बार-बार किए गए फॉलो-अप का कथित तौर पर कोई जवाब न मिलने पर, कंपनी ने अक्तूबर 2024 में 4 करोड़ रुपये ब्याज सहित कानूनी नोटिस जारी कर मांग की।
साथ ही चेतावनी दी कि 30 दिनों के अंदर पेमेंट न करने पर डील खत्म कर दी जाएगी। सभी राइट्स कंपनी को वापस मिल जाएंगे। नवंबर 2024 में इस समय सीमा के समाप्त होने के बाद, ड्रीम वॉरियर का कहना है कि समझौता कैंसिल हो गया था और ‘भोला’ से जुड़े सभी अधिकार उसे वापस मिल गए थे।
ड्रीम वॉरियर ने की अदालत से ये मांग
अब ड्रीम वॉरियर ने 22 मार्च 2026 को यह कमर्शियल इटंलैक्चुअल प्रॉपर्टी का केस फाइल किया है। इसमें रिलायंस और अजय देवगन फिल्म्स को ‘भोला’ फिल्म के डिस्ट्रिब्यूशन, स्ट्रीमिंग या उससे कमाई करने से रोकने के लिए अदालत से आदेश की मांग की गई है।
यह भी मांग की गई है कि समझौतों को औपचारिक रूप से समाप्त घोषित किया जाए। साथ ही फिल्म और उससे जुड़े कंटेंट से होने वाली पूरी कमाई के आधार पर मुआवजा दिया जाए। इस मामले में अमेजन प्राइम वीडियो, जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज और टी-सीरीज सहित कई डाउनस्ट्रीम प्लेटफॉर्म्स को भी नामजद किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि 27 नवंबर, 2024 के बाद फिल्म की कोई भी स्ट्रीमिंग इल्लिगल है।
किसके क्षेत्राधिकार में है मामला?
सुनवाई के दौरान ‘भोला’ के मेकर्स की ओर से कहा गया कि पक्षों के बीच शुरुआती समझौते में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि केवल चेन्नई की अदालतों के पास ही क्षेत्राधिकार होगा। उन्होंने तर्क दिया कि दूसरे समझौते के आधार पर मामला बॉम्बे हाई कोर्ट में नहीं लाया जा सकता। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद,अदालत ने क्षेत्राधिकार के प्रश्न पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।