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कैटरीना कैफ खुद हैं अपनी फिल्म फितूर के लिए सबसे बड़ा खतरा!

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कोई हीरोइन अपनी फिल्म के लिए खतरा भी साबित हो सकती है। हाल में रिलीज हुआ फिल्म फितूर का ट्रेलर देखें तो इस बात पर भरोसा कर लेंगे। कश्मीर की वादियों में, सधे हुए उर्दू-हिंदी संवादों के बीच कैटरीना कैफ के ब्रिटिश-अंग्रेजी लहजे वाली हिंदी पूरी खूबसूरती पर खरोंच लगा देती हैं।
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पिछले साल फैंटम के पिटने के बाद कैटरीना कैफ को शीर्षस्थ अभिनेत्रियों में बने रहने के लिए एक बड़ी हिट की सख्त जरूरत है। उनकी फिल्म फितूर अगले महीने रिलीज होने वाली है। तीन दिन पहले फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ। ट्रेलर पर सबकी अपनी राय हो सकती है लेकिन इसमें कैटरीना की एंट्री होते ही यह साफ हो जाता है कि वह फिल्म के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं।

अक्सर होता है कि दिलकश बुत मुंह खोलते ही ढह जाते हैं। फितूर के ट्रेलर में कैटरीना का पहला ही संवाद इस बात की नजीर है। फितूर का ट्रेलर रूमानी संवादों के साथ शुरू होता है, मगर जैसे ही कैटरीना ब्रिटिश लहजे की अंग्रेजी में रचा-बसा पहला डायलॉग बोलती हैं तो सारी लज्जत खत्म हो जाती है। आप कानों पर हाथ रख लेना चाहते हैं।
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तब्बू के सामने कैटरीना का लहजा पिन चुभाने जैसा

अन्य किरादरों के मुकाबले कैटरीना के संवादों का फर्क फिल्म में यूं भी ज्यादा स्पष्ट दिख रहा है कि निर्देशक अभिषेक कपूर के लेखकों ने कहानी के क्लासिक अंदाज और कश्मीर की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए जरा काव्यात्मक भाषा का इस्तेमाल किया है। यहां रोजमर्रा की या सड़कछाप/टपोरी भाषा नहीं है।

ऐसी फिल्म जिसमें कैटरीना की मां बनी तब्बू बेहतरीन हिंदी-उर्दू बोलती हैं, उसमें कैटरीना का अंग्रेजीछाप हिंदी वाला लहजा आकर्षक गुब्बारे में पिन चुभोने का काम कर रहा है। इसमें कम ही संदेह है कि हॉल में कैटरीना जब-जब संवाद बोलेंगी, दर्शक या तो कान बंद कर लेंगे या फिर हंसेंगे।

कैटरीना को बॉलीवुड में आए दस साल से अधिक हो चुके हैं मगर उन्हें सही उच्चारण वाली हिंदी बोलना नहीं आया। जबकि अमेरिका में प्रियंका चोपड़ा को टेलीविजन पर काम करने तक के लिए वहां के उच्चारण वाली अंग्रेजी सीखनी पड़ती है, तब उन्हें सम्मान मिलता है। मगर बॉलीवुड में चेहरा और त्वचा का रंग प्रतिभा के पैमाने हैं।

कैटरीना को झेल रहे हैं फिर भी असहिष्णुता?

बॉलीवुड के ज्यादातर निर्माता-निर्देशक समझौता-परस्त हैं। पिछली फिल्मों में वे कैटरीना के किरदारों को अंग्रेजी लहजे वाली हिंदी बोलने की छूट देने के लिए चोर रास्ता निकालते आए हैं। आप कैटरीना की फिल्में देखिए, पाएंगे कि ज्यादतर में बताया गया है कि वह जो किरदार निभा रही हैं वह विदेश में पैदा हुआ, पढ़ा-लिखा-बढ़ा है। अतः उसे हिंदी का सही उच्चारण करने की कोई जरूरत नहीं।

एक दशक से अधिक समय हुआ, अगर हमारे दर्शक कैटरीना की ऐसी हिंदी झेल रहे हैं तो किसी का भी यह कहना कि देश में सहिष्णुता का अभाव है, उसे संदिग्ध बनाता है। फितूर में भी आप कैटरीना को लेकर पुराना तर्क ही देखेंगे। फितूर के बाद इस साल आने वाली कैटरीना की दो और फिल्मों में भी संभवतः उनमें कोई सुधार नहीं दिखने वाला।

रॉक ऑन और काय पो चे बनाने वाले अभिषेक कपूर ने अंग्रेजी के महान लेखक चार्ल्स डिकंस के क्लासिक उपन्यास ग्रेट एक्सपेक्टेशंस से आइडिया लेकर फितूर को गढ़ा है। इस कहानी में एक अय्याश-चालाक और रईस मां अपनी बेटी को इसलिए किसी से प्रेम नहीं करने देना चाहती क्योंकि उसे प्रेम में धोखे मिले थे। इसीलिए वह दोनों प्रेमियों को जुदा करने के षड्यंत्र रचती रहती है।
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अमीर-गरीब का फार्मूला नए रंग-रोगन के साथ

कहानी में एक और ट्विस्ट यह कि बेटी का प्रेमी अनाथ और गरीब भी है। अतः अमीर-गरीब का शताब्दी पुराना फार्मूला आपको फितूर में नए रंग-रोगन के साथ दिखेगा। अभिषेक ने कहानी को समकालीन बनाने के लिए इसमें कश्मीर समस्या का तड़का लगाया है। ट्रेलर में आप हीरो आदित्य रॉय कपूर को दो बार चिल्लाते देखते हैं, ‘दूध मांगा तो खीर देंगे, कश्मीर मांगा तो चीर देंगे।’

अभिषेक ने कश्मीर समस्या को क्यों प्रेम कथा में पिरोया, यह फिल्म देखने पर ही पता चलेगा। परंतु यह याद रखना जरूरी है कि लोग अभी तक विशाल भारद्वाज की हैदर को नहीं भूले हैं। फिल्म में अनाथ-गरीब बच्चा जवां होकर एक चित्रकार (आदित्य रॉय कपूर) बनता है, जो अपने स्टूडियो में ज्यादातर बगैर बनियान, शर्ट या टी-शर्ट के घूमता है। निश्चित ही निर्देशक के मन में होगा कि वह इस तरह युवतियों को फिल्म के प्रति आकर्षित कर सकेगा।

गौर करने वाली बात यह है कि आशिकी-2 में आदित्य कपूर के किरदार में एक आवारापन था, जिससे दर्शक उनकी तरफ आकर्षित हुए थे। यही आदित्य थे जो दावत-ए-इश्क में कहीं से लखनवी नहीं लग सके थे और फितूर में अब कश्मीरी नहीं दिख पा रहे हैं। अभिषेक की फिल्म का ट्रेलर सामने आते ही इसकी समस्याएं भी साफ नजर आने लगी हैं।

गरीब-अमीर के चालू फार्मूले वाली कहानी और कश्मीर की भुना लेने जैसी राजनीतिक कश्मकश के बीच कैटरीना की ‘हिंदी’ उनकी फिल्म के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है।
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