इस पत्र में आदित्य लिखते हैं, “सन् 1970 में मेरे पिताजी यश चोपड़ा ने अपने भाई का दिया वरदहस्त और ऐशोआराम त्याग कर अपनी खुद की कंपनी खड़ी की थी। उस वक्त तक वह एक वेतनभोगी कर्मचारी हुआ करते थे और अपना खुद का कहने के लिए उनके पास कुछ भी नहीं था। उन्हें पता नहीं था कि कोई बिजनेस कैसे चलाया जाता है और कंपनी बनाने के लिए किन-किन चीजों से गुजरना पड़ता है, इसका उन्हें बुनियादी ज्ञान तक नहीं था। उनके पास मात्र अपने टैलेंट पर भरोसा और कड़ी मेहनत की पूंजी थी, साथ ही साथ अपने पैरों पर खड़े होने का सपना भी उनकी आंखों में तैर रहा था। एक रचनात्मक व्यक्ति द्वारा खुद और अपनी कला को छोड़कर किसी और चीज के भरोसे न रहने वाले दृढ़ विश्वास ने यशराज फिल्म्स को जन्म दिया।“
हिंदी सिनेमा के दिग्गज निर्माता निर्देशक यश चोपड़ा की स्थापित कंपनी यशराज फिल्म्स के 50 साल पूरे होने पर ‘अमर उजाला’ ने भी कुछ खास आयोजन किए। अमर उजाला की रविवारीय पत्रिका की कवर स्टोरी ‘सिनेमा का यश’ यश चोपड़ा पर ही रही। इसके अलावा अमर उजाला डिजिटल ने भी यश चोपड़ा की शख्सीयत के तमाम अलग अलग पहलुओं पर उनके साथ काम करने वालों के अनुभवों पर आधारित रपटें प्रकाशित कीं।
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