बॉलीवुड अभिनेता और बिजनेसमैन सचिन जोशी को मुंबई की एक कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिग केस में जमानत दे दी है। कोर्ट ने पाया है कि अभिनेता-निर्माता सचिन जोशी फर्म ओंकार रियल्टर्स एंड डेवलपर्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में किसी भी तरह से शामिल नहीं थे। सचिन जोशी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पिछले साल 14 फरवरी को गिरफ्तार किया था। सचिन की जमानत पर आदेश देते हुए स्पेशल जज एमजी देशपांडे ने उन्हें 30 लाख का मुचलका और देश छोड़ने पर रोक की शर्त के साथ बेल दी है।
गौरतलब है कि 37 वर्षीय अभिनेता-निर्माता अभी स्वास्थ्य कारणों के चलते अंतरिम जमानत पर बाहर हैं। उनकी जमानत का विस्तृत आदेश मंगलवार को रिलीज किया गया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का कोई केस नहीं बनता है।
ईडी ने दावा किया था कि ओंकार रियल्टर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (ओआरडीपीएल) की सहयोगी कंपनी सुराणा डेवलपर्स वडाला ने एक पुनर्विकास परियोजना के लिए फर्जी तरीके से झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों और एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स) की संख्या बढ़ाकर 410 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। ईडी ने कहा था कि उनकी जांच में पता चला है कि 410 करोड़ रुपये का लोन अमाउंट की सचिन जोशी से संबंधित कंपनी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की गई थी।
मामले में जोशी के अलावा ओंकार रियल्टर्स एंड डेवलपर्स के चेयरमैन कमल किशोर गुप्ता (62), इसके प्रबंध निदेशक बाबूलाल वर्मा (51) को भी गिरफ्तार किया गया था। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।