साल 2014 में आई फिल्म 'पीके' के बाद सुस्त पड़े आमिर खान अचानक सक्रिय नजर आने लगे हैं। हाल ही में उन्हें हरियाणा के छोटे शहरों के चौराहे पर टूटी-फूटी हरयाणवी बोलते देखा गया। आमिर भिवानी के एक मध्यमवर्गीय परिवार की शादी में वधु पक्ष की तरफ से शरीक होते देखे गए। आमिर का 'फैट टू फिट' कैंपेन इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में है।
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इसमें आमिर अपने मोटे-थुलथुले शरीर से फिट और चुस्त-दुरुस्त कायाकल्प के जरिए लोगों को संदेश देते नजर आ रहे हैं। दरअसल आमिर खान की इस अचानक सक्रियता में ही उनकी कामयाबी का राज छिपा है। इसी सक्रियता को बॉलीवुड में 'प्रमोशनल फंडा' माना जाता है। जिसमें आमिर खान अपने काम की तरह ही एकदम परफेक्ट माने जाते हैं।
ऐसा लगता है कि प्रमोशन के इन पैंतरों पर आमिर को इतना यकीन है कि इसके लिए वो किसी भी सीमा तक जाने के लिए तैयार रहते हैं। हर फिल्म के लिए आमिर अलग-अलग स्ट्रेटेजी बनाते हैं, जो एकदम नई और प्रभावी होती है। वो हमेशा इसे वनमैन शो के स्टाइल में अमली जामा पहनाते हैं।
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19 दिसंबर, 2014 को रिलीज हुई फिल्म 'पीके' को प्रमोट करने के लिए आमिर ने भोजपुरी सीखी थी। फिल्म के फर्स्ट लुक के साथ ही जारी किए गए मोशन पोस्टर में आमिर भोजपुरी बोलते हुए दिखाई दिए। आमिर ने इस बात को लेकर और अधिक उत्सुकता बढ़ाने के लिए अपने ट्विटर अकाउंट पर भोजपुरी में ही मैसेज लिखने भी शुरू कर दिए थे, जिससे दर्शकों में उनके फिल्म 'पीके' के प्रति उत्सुकता बने।
फिल्म के प्रमोशन के लिए आमिर खान ने पुतलों का इस्तेमाल किया था, जो थियटर्स में रखे गए। जब इन पुतलों के पास दर्शक गए तो आमिर उनसे भोजपुरी में बात करते दिखे। दरअसल, इन पुतलों में आमिर की रिकॉडेड आवाज थी।
फिल्म 'धूम 3' के प्रमोशन के दौरान शुरुआत में आमिर गायब नजर आए। इसे उनके और यशराज फिल्म्स के बीच तनाव के रूप में पेश कर मीडिया में हाइप बनाया गया। क्लाइमैक्स पर पर्दा उठा और तीसरे राउंड के प्रमोशन से जब आमिर हर छोटे-बड़े सेंटर पर पब्लिक से रूबरू हुए तो उनके आने की ख़बर यकीनन मीडिया में खूब हॉट रही।
इससे फिल्म लगातार चर्चाओं में बनी रही और फ़िल्म को जबरदस्त कामयाबी मिली। यह सब आमिर खान की प्लानिंग का एक हिस्सा भर था। फिल्म 'पीपली लाइव' को प्रमोट करने के लिए आमिर ने तब मंहगाई से जूझ रही जनता के सामने इस फिल्म का गाना 'मंहगाई डायन खायत जात है...' के ओरिजनल सिंगर्स को इंट्रोड्यूज करने के अलावा मॉल्स और कई अन्य जगहों पर लाइव परफॉरमेंस करवाए।
इतना ही नहीं आमिर ने खुद इस फिल्म के प्रमोशन के दौरान ड्रम बजाकर भी मीडिया और दर्शकों को अट्रेक्ट किया। 'गजनी' की रिलीज से पहले आमिर ने तमाम गंजों की फौज के साथ अपनी फिल्म का प्रमोशन किया। फिल्म के प्रमोशन के लिए सड़कों पर उस्तरा लेकर भी घूमे और अपने कुछ फैन्स का 'गजनी हेयरस्टाइल' बनाकर अखबारों में खूब सुर्खियां बटोरी। पूरी बॉडी पर टैटू लगाए गए पोस्टर देख दर्शक पहले ही उत्साहित थे और जब आमिर ने इसमें अपनी मार्केटिंग प्लानिंग मिक्स कर ली तो यह फिल्म बंपर हिट रही।
फिल्म 'थ्री इडियट्स' के प्रमोशन के दौरान आमिर की व्यवसायिक सोच अपने चरम पर दिखी. आमिर इस फ़िल्म के प्रमोशन के दौरान बहुरूपिया का रूप धारण कर ऑटो रिक्शे से घूमते नज़र आए, तो कभी गांव के स्कूलों में बच्चों के बीच चाय लेकर पहुंच गए। फिल्म रिलीज होने से पहले आमिर खान अलग-अलग गेटअप में देश के अलग-अलग शहरों में घूमे। आमिर खान का गेटअप वाकई इतना नया और बनावटी था कि कोई उन्हें पहचान ही नहीं पाया। फिल्म 'मंगल पांडे' की रिलीज से पहले जो इंटरव्यू हुए, उनमें आमिर ख़ान ने सभी जर्नलिस्ट्स से उनकी मूंछें खींचने के लिए कहा, ताकि वो चैक कर सकें कि ये असली हैं या नकली। इस तरह की छोटी-छोटी लेकिन अट्रेक्टिव मार्केटिंग स्ट्रैटजी से आमिर अपनी फिल्मों की हाइप बढ़ाते रहे।
आमिर खान फिल्म 'तलाश' के लिए मुंबई के क्राइम रिपोर्टर से मिले थे। जहां उन्होंने क्राइम रिपोर्टिंग की फील्ड में होनेवाली दिक्कतों को साझा किया। साथ ही क्राइम रिपोर्टर्स से बारे में जानकारी ली।
फ़िल्म 'लगान' के लिए आमिर ने जो मार्केटिंग फंडा अपनाया उससे सब दंग रह गए थे। 'लगान' के प्रमोशन में आमिर लगान के सभी मुख्य किरदारों के साथ फिल्म में अपनाए गए गेटअप में ही विभिन्न मॉल्स और सार्वजनिक जगहों पर पहुंचे। इतना ही नहीं पूरी टीम ने मॉल में 'लगान' फिल्म में अपनाए गए अपने-अपने गेटअप में ही क्रिकेट भी खेला। यह देखकर निश्चित था कि पब्लिक फिल्म से कनेक्ट होती चली गई और आमिर की यह मार्केटिंग स्ट्रेटजी काम कर गई।
इतना ही नहीं आमिर ने 'लगान' की रिलीज से पहले क्रिकेट की दुनिया के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को फिल्म दिखाकर भी तब खूब सुर्खियां बटोरीं थी। बॉलीवुड में फिल्म प्रमोशन फिल्म की लागत का ही हिस्सा माना जाता है और इस पर भारी-भरकम रकम भी खर्च की जाती है, लेकिन आमिर की सोच अलग है। फिल्म के वरिष्ठ समीक्षक अजय ब्रह्मात्मज के मुताबिक, "फिल्म की मेकिंग पर आमिर का जितना ध्यान होता है, उससे कई ज्यादा ध्यान वो फ़िल्म के प्रमोशन पर देते हैं। आमिर ने फिल्म प्रमोशन के लिए एक ख़ास टीम बना रखी है। जिसमें मार्केटिंग, मीडिया और स्ट्रेटेजी से जुड़े लोग शामिल हैं। आमिर की स्ट्रेटेजिकल समझ ही उनकी फिल्मों को खास बना देती है।"
आमिर की फिल्मों की मार्केटिंग एजेंसी "स्पाइस" की प्रमुख शिल्पा हांडा के मुताबिक, "यह पूरी स्ट्रेटेजी ज्यादातर आमिर के ही दिमाग की उपज होती है, जिसे हम हर संभव तरीके से जमीनी स्तर पर लाने की कोशिश करते हैं। कभी-कभी हम अपना आइडिया भी उनसे शेयर करते हैं, लेकिन उन्हें पसंद आने या ना आने पर निर्भर करता है।"