उज्जवल निकम
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वहीं उज्जवल निकम की बात करें तो, उज्जवल को आंतकवाद संबंधी मामलों का मास्टर माना जाता है। उनके बारे में यह कहा जाता है कि वह जिस केस को अपने हाथ में ले लें उसमें गुनहगार सजा से बच नहीं पाता है। उज्जवल चर्चा में तब आए जब उन्हें 26/11 हमले में पकड़े गए एकमात्र जिंदा आतंकी कसाब का केस उन्हें सौंपा गया। इसके अलावा उन्होंने 1993 के बॉम्बे बम धमाकों, गुलशन कुमार हत्याकांड, प्रमोद महाजन हत्या मामलों के संदिग्धों के खिलाफ मुकदमा चलाने में मदद की। उज्जवल ने अपने करीब 30 सालों के करियर में 628 मुल्जिमों को उम्रकैद और 37 को फांसी की सजा दिलाई है। कहा जाता है कि कई बार उन्हें अंडरवर्ल्ड और आतंकी संगठनों से धमकी भी मिल चुकी है। जिसके चलते केन्द्र सरकार ने उन्हें जेड प्लस सुरक्षा भी दी। ऐसी सुरक्षा प्राप्त करने वाले वह देश के इकलौते वकील रहे हैं।
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