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A Holy Conspiracy Review: नसीर की कैमरे के सामने दमदार अदाकारी, लेकिन अपने मूल उद्देश्य से चूक गई फिल्म

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‘अ होली कांस्पीरेसी’ - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
अ होली कांस्पीरेसी
कलाकार
नसीरुद्दीन शाह , सौमित्र चट्टोपाध्याय , पार्थ प्रतिम मजूमदार और कौशिक सेन
लेखक
सैबल मित्रा
निर्देशक
सैबल मित्रा
निर्माता
जयदीप रॉय चौधरी और सुव्रा सारथी चक्रवर्ती
रिलीज डेट
29 जुलाई 2022
रेटिंग
1/5

फिल्म ‘अ होली कांस्पीरेसी’ उन दिनों की कहानी है जब अमेरिका में एक शिक्षक को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार कर लिया जाता है, क्योंकि वह जीवन की उत्पत्ति और क्रमिक विकास के बारे में पढ़ा रहा था। यह कहानी सिर्फ एक मुकदमे की कहानी नहीं है, बल्कि ऐसे कानून को लेकर हुई बहस को ज्यादा तवज्जो देती है, जिसे करीब 50 साल पहले अमेरिकी सरकार ने खत्म कर दिया था। लेकिन जीवन के विकास सबंधी वैज्ञानिक सिद्धांत और मान्यताओं के बीच जो बहस एक सदी से ज्यादा पुरानी हो गई, आज भी जारी है। यह मुकदमा उन दिनों दुनियाभर में खूब चर्चित हुआ था। इसी विषय पर अमेरिका का चर्चित नाटक ‘इनहेरिट द विंड’ है, जिस पर ‘अ होली कांस्पीरेसी’ फिल्म बनी है।  

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‘अ होली कांस्पीरेसी’ - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अमेरिकी नाटक ‘इनहेरिट विंड’ पर आधारित
इस फिल्म की कहानी को बंगाल की पृष्ठभूमि पर बनाया गया है, जिसमें दिखाया गया है कि एक शिक्षक को इसलिए गिरफ्तार कर उस पर मुकदमा चलाया जाता है, क्योंकि उसने एक छोटे शहर के स्कूल में विज्ञान पढ़ाते वक्त धर्म की भूमिका का जिक्र नहीं किया। इस फिल्म की कहानी कोर्ट में चलने वाले मुकदमे के इर्द गिर्द बुनी गई है। वकील की भूमिका निभा रहे सौमित्र चट्टोपाध्याय और नसीरुद्दीन शाह के बीच बहस चलती है कि धर्म और विज्ञान में से ज्यादा महत्वपूर्ण क्या है?

‘अ होली कांस्पीरेसी’ - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सौमित्र दा और नसीरुद्दीन शाह का बेजोड़ अभिनय
सौमित्र दा बंगला सिनेमा के उम्दा कलाकार है। ऑस्कर अवॉर्ड विनिंग डायरेक्टर सत्यजीत रे की फिल्मों से लेकर अब तक करीब  100 फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। दो साल पहले कोविड के दौरान 85 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई। नसीरुद्दीन शाह का अपना एक अलग आभामंडल है। कोर्ट रूम में जब दोनों अभिनेताओ के बीच सीन चलता है तो स्क्रीन पर आंखें टिकी रहती है। फिल्म के बाकी कलाकार पार्थ प्रतिम मजुमदार, कौशिक सेन, अनसुआ मजुमदार, अमृता चट्टोपाध्याय और समन्तक दत्ता ने अपनी भूमिकाओं में ईमानदार रहने की कोशिश की है।

‘अ होली कांस्पीरेसी’ - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अदाकारी के सिवा कुछ नहीं
कोर्ट सीन को छोड़ दें तो फिल्म में बाकी ऐसा कोई सीन नहीं है, जो दर्शको के जेहन में याद रहे। फिल्म बंगाल की पृठभूमि पर है तो अधिकतर संवाद बंगाली भाषा में ही हैं। अशोक दासगुप्त की सिनेमेटोग्राफी और तजेंद्र नारायण मजुमदार का संगीत सामान्य है। एडिटर सुमित घोष थोड़ी सी और मेहनत और करते तो फिल्म चुस्त हो सकती थी।
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‘अ होली कांस्पीरेसी’ - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
देखें कि न देखें
जो दर्शक मसाला फिल्मे देखने के शौकीन हैं उनको यह फिल्म समझ में नहीं आएगी, रही बात खास वर्ग के दर्शकों की तो उनके लिए ये फिल्म जल्द ही ओटीटी पर आ ही जाएगी तो इसे वहीं देखना बेहतर होगा।
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