सिनेमा मनोरंजन के साथ सार्थक बहस करता है। विमर्श के लिए नए विषय सामने लाता है। हर साल कुछ ऐसी फिल्में आती हैं। पिछले बरस कोर्ट, मार्गरीटा विद अ स्ट्रॉ, मांझीः द माउंटेन मैन, हंटर, मसान, तेवर, एंग्री इंडियन गॉडेसेस जैसी फिल्में दिखीं। 2016 में भी सिनेमा कुछ कदम आगे बढ़ेगा।
पत्रकार से निर्देशक बने झारखंड के मूल निवासी बिकास मिश्रा की पहली फिल्म पर तमाम नजरें टिकी हैं। फिल्म इस सप्ताह रिलीज हो रही है। अंतरराष्ट्रीय समारोहों में सराहे जाने के साथ इसे पिछले साल मुंबई फिल्म फेस्टिवल (मामी) में सर्वश्रेष्ठ भारतीय फिल्म का अवार्ड मिला था।
उत्तर भारत में जाति की ऊंच-नीच पर कड़ी पड़ताल करती चौरंगा के केंद्र में एक किशोरवय दलित बच्चे की प्रेम कहानी है। प्यार का पहला खत लिखने की जिद्दो-जहद और उसका अंजाम कहानी के दो छोरों को बांधता है। इनके बीच कई तीखे सवाल पैदा होते हैं। संजय सूरी और तनिष्ठा चटर्जी फिल्म में ब्राह्मण और दलित किरदारों की मुख्य भूमिकाएं निभा रहे हैं।
चॉक एंड डस्टर
शिक्षा समाज को सुदृढ़ करने के लिए है या फिर कारखानों की तरह चला कर पैसा बनाने के लिए? उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद की यह सबसे चमकीली किरण क्या कुछ पूंजी के लालचियों हाथों में कैद हो चुकी है?
शिक्षा व्यवस्था को अपनी बेड़ियों में जकड़ लेने वालों के विरुद्ध शिक्षकों का ही संघर्ष निर्देशक जयंत गिलाटर की इस फिल्म में नजर आएगा। साथ ही बदलते परिवेश में छात्रों और शिक्षकों के संबंध तथा द्वंद्व भी इसमें दखेंगे।
शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाती आरक्षण और पाठशाला जैसी फिल्में भी पहले आ चुकी हैं लेकिन वे दर्शकों के दिलों को नहीं छू सकी। जूही चावला और शबाना आजमी स्टारर चॉक एंड डस्टर नए सवालों को समाज के ब्लैकबोर्ड पर दर्ज करा सकती है।
अलीगढ़
समलैंगिकता प्राकृतिक आचरण है या विकृति? इस पर बहुत विवाद है। निर्देशक हंसल मेहता ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ विश्वविद्यालय में मराठी पढ़ाने वाले प्रो.श्रीनिवास रामचंद्र सिरस की जिंदगी में कुछ साल पहले हुए हादसे पर यह फिल्म बनाई है।
एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद प्रोफेसर को न केवल नौकरी खोनी पड़ी बल्कि जो बदनामी मिली उससे उन्होंने जिंदगी से भी मुंह मोड़ लिया। मनोज बाजपेयी फिल्म में प्रोफेसर की भूमिका हैं और उनके दमदार अभिनय फिल्म को नई ऊंचाई दी है।
राजकुमार राव यहां एक पत्रकार की भूमिका में दिखेंगे, जो समलैंगिकता का विमर्श आगे बढ़ाता है। अंतरराष्ट्रीय समारोहों में फिल्म बेहद सराही गई है। उम्मीद है कि अलीगढ़ भारतीय समाज की सोच को नई दिशा देगी।
ये लाल लंग
हिंदी सिनेमा के पर्दे पर लाल रंग तो खूब बहा है लेकिन ब्लड बैंक को केंद्र में रख कर किसी ने अभी तक कहानी नहीं कही। निर्देशक सैयद अहमद अफजल हरियाणा की पृष्ठभूमि में ये लाल रंग की कहानी ला रहे हैं।
फिल्म में रणदीप हूडा और अक्षय ओबेराय हैं जो खून की चोरी का धंधा करते हैं। हाईवे के बाद रणदीप एक बार फिर अपने गृह प्रदेश हरियाणा के युवक के रोल में होंगे। फिल्म में थ्रिलर, ड्रामा और डार्क ह्यूमर है।
बताया जाता है कि यह एक सच्ची घटना से प्रेरित है। करनाल के ब्लड बैंक में एक हादसा हुआ था, जहां पर खून की चोरी होती थी। फिल्म में होने वाला हादसा किरदारों की जिंदगी बदल देता है। इंसान के खून की कीमत और महत्व दोनों को यह फिल्म स्थापित करती है।
जुबान
लंचबॉक्स जैसी फिल्म की निर्माता गुनीत मोंगा की यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय समारोहों में पुरस्कृत होने के बाद इस साल भारत में रिलीज होने की तैयार है। पंजाब की पृष्ठभूमि में यह कहानी दिलशेर नाम के ऐसे युवा की है जो संगीत की दुनिया में ऊंचा मुकाम हासिल करने के ख्बाव देखता है।
लेकिन हादसे उसे इस तरह से तोड़ते हैं कि वह संगीत के नाम से डरने लगता है। ईश्वर में उसकी आस्था भी डांवाडोल हो जाती है। ऐसे वक्त में जिंदगी करवट बदलती है और उसका संघर्ष रंग लाता है।
सपनों की इस उड़ान का मुख्य चेहरा हैं 2015 की चर्चित फिल्म मसान के नायक विक्की कौशल। सारा जेन डियाज एक संगीतमय भूमिका निभा रही हैं।
तुंबड
2013 में शिप ऑफ थिसियस जैसी ऑफबीट फिल्म बना कर चर्चा में आए आनंद गांधी इन दिनों अपने प्रोडक्शन हाउस की अगली फिल्म तुंबड को अंतिम रूप देने में लगे हैं। यह पीरियड ड्रामा है, जिसे राही अनिल बर्वे ने निर्देशित किया है।
मराठी-हिंदी की इस फिल्म में पुणे के एक ब्राह्मण परिवार और उसकी तीन पीढ़ियों की कहानी है। इस कुटुंब में सदियों से बना हुआ एक रहस्य पीढ़ियों के अंतराल में खो गया है और अब इसके युवा उस रहस्य की तलाश में हैं।
1930 का दशक दिखाने वाली तुंबड में फंतासी और कुछ विचित्र जीवों से हीरो का मुकाबला है। सोहम शाह फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और उनका रोल एंटी-हीरो का है।
तेरे बिन लादेन डेड ऑर अलाइव
अगर आपने 2010 में निर्देशक अभिषेक शर्मा की तेरे बिन लादेन पसंद की थी तो उसका सीक्वल आपको आकर्षित करेगा। इस कॉमिक कहानी का मूल आइडिया यह है कि आतंकियों के सरगना ओसामा बिन लादेन की ‘रहस्यमय’ मौत के बाद अमेरिका खुफिया एजेंसी सीआईए एक बॉलीवुड निर्देशक को इस बात के लिए तैयार करती है।
वह आंतकी की मौत का एक नकली टेप शूट करे, जिसे दुनिया के सामने लाकर बताया जा सके कि वह मारा गया है। पाकिस्तानी आतंकी संगठनों को इस बात की खबर लग जाती है और वह ऐसा ही एक अन्य टेप शूट करके दुनिया के सामने साबित करने की कोशिश करते हैं कि बिन लादेन जिंदा है!
ट्रिपल एक्स
सेंसर बोर्ड को यह फिल्म चुनौती देगी। निर्देशक केन घोष उत्तेजित करने वाले रोमांस की थ्रिलरनुमा सेक्स कथाओं को पर्दे पर उतार रहे हैं। ट्रिपल एक्स में छह अलग-अलग कहानियां होंगी। जिनमें सेक्स संबंध केंद्र में रहेंगे।
इन्हें कितने बोल्ड अंदाज में दिखाया जाएगा, इसका अंदाज आप यूं लगा सकते हैं कि निर्माता एकता कपूर ने फिल्म की नायिका कायरा दत्त के अनुबंध पत्र में न्यूडिटी क्लॉज रखा है कि शूटिंग के दौरान उन्हें हर वह सीन बेझिझक शूट करना होगा, जिसके लिए उन्हें कहा जाएगा।
कायरा सभी कहानियों में नजर आएंगी। बाकी स्त्री-पुरुष कलाकारों से भी ऐसे ही अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। देखना होगा कि सेंसर बोर्ड इस फिल्म की चुनौती को कैसे लेगा?