हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में पवन मल्होत्रा ने बताया कि 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द केरला स्टोरी' जैसी हालिया फिल्मों के कारण लोग '72 हूरें' को एक ही श्रेणी में रख रहे हैं। उन्होंने यह बात भी उठाई कि अगर ऐसी फिल्में बन रही हैं तो इससे किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। ईमानदारी से दिखाई गईं कहानियों में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि '72 हूरें' फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' रिलीज होने से पहले ही बनाई गई थी, फिल्म के निर्देशक संजय पूरन सिंह चौहान ने 2019 में राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता था।
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'72 हूरें' की स्क्रीनिंग भी जेएनयू में हुई थी। निर्माताओं का मानना है कि कश्मीरी मुसलमानों और अन्य छात्रों के लिए एक ऐसी फिल्म के बारे में अपने विचार व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो आतंकवादी शिविरों की कठोर वास्तविकता का पता लगाती है। पवन ने यह भी बताया कि कैसे वह 'द कश्मीर फाइल्स' द्वारा किए गए हंगामे को समझ नहीं पाए। उन्होंने कहा कि कि जब उन्होंने फिल्म देखी तो उन्हें लगा कि निर्माता ने कुछ भी आपत्तिजनक नहीं दिखाया है।
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