मोहम्मद रफी आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन फिजा के कण-कण में उनकी आवाज गूंजती हुई महसूस होती है। हिंदुस्तान का हर संगीत प्रेमी रफी साहब की दिलकश आवाज का दीवाना है।
आज रफी साहेब का जन्मदिन है।
24 दिसंबर, 1924 को पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह गांव में उनका जन्म हुआ था। महज 13 साल की उम्र से सार्वजनिक मंच पर गाने की शुरुआत करने वाले इस महान गायक ने 13-14 भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, स्पैनिश, डच और पारसी भाषा में भी गाने गाए।
6 बार फिल्म फेयर अवार्ड हासिल करने वाले पद्मश्री मोहम्मद रफी ने दिलीप कुमार, देवानंद, शम्मी कपूर, राजेंद्र कुमार, जॉय मुखर्जी, धर्मेद्र, राजेश खन्ना समेत तमाम बड़े अभिनेताओं के लिए गाया।
सुरों के सरताज प्रख्यात पार्श्वगायक मोहम्मद रफी की 33वीं पुण्यतिथि पर उनके गाए कुछ यादगार नगमों पर एक नजर,
तुम मुझे यूं भुला न पाओगे... (फिल्म- पगला कहीं का)
आदमी मुसाफिर है...(फिल्म- अपनापन)
बहारों फूल बरसाओ मेरा मेहबूब आया है...(फिल्म- सूरज)
क्या हुआ तेरा वादा...(फिल्म- हम किसी से कम नहीं)