कभी आपने गौर किया है कि उभरते सुपरस्टार कार्तिक आर्यन ने फिल्मों में आने पर अपना असली नाम कार्तिक तिवारी क्यों नहीं इस्तेमाल किया, या फिर कि मनोज शुक्ला क्यों मनोज मुंतशिर बन गए? उत्तर भारत से आए बड़े सितारों में मनोज तिवारी ही ऐसे रहे जिन्होंने अपना नाम नहीं बदला लेकिन उनके साथ ही भोजपुरी में शोहरत पाने वाले रवि किशन शुक्ला ने कभी अपने सरनेम का इस्तेमाल सिनेमा में नहीं किया। वह अपना नाम रवि किशन ही लिखते रहे और उनकी कद काठी ऐसी है कि फिल्म निर्माता मोहनजी प्रसाद ने उन्हें मराठी अभिनेता समझकर रिजेक्ट ही कर दिया था। ये तो भला हो अभिनेता ब्रजेश त्रिपाठी का जिन्होंने निर्माता को उनकी जन्मभूमि के बारे में विस्तार से बता दिया।
मोहनजी प्रसाद कोलकाता से मुंबई आए। उस समय ब्रजेश कई धारावाहिकों की शूटिंग में व्यस्त थे और चाहकर भी उनसे मिल नहीं पा रहे थे। एक दिन जैसे ही उनसे भेंट हुई वह छूटते ही ब्रजेश से बोले, 'देखे कोई लड़का?' ब्रजेश त्रिपाठी ने दूरदर्शन के धारावाहिक ‘हवाएं’ में काम कर रहे एक नए लड़के के बारे में उन्हें बताया और जल्द ही उसे लेकर मोहनजी प्रसाद के पास आने की बात कही। फिर एक दिन रवि किशन को लेकर रात 10.30 बजे ब्रजेश त्रिपाठी पहुंच गए मोहनजी प्रसाद के पास। रवि किशन को देखकर मोहनजी प्रसाद हताश हो गए। बोले, ‘ये मराठी लड़के को कहां से उठा लाए?’ ब्रजेश त्रिपाठी ने मोहनजी प्रसाद को बताया कि इस लड़के का नाम रवि किशन शुक्ला है और यह जौनपुर का रहने वाला है।'