पापा की मौत से जन्मी 'ब्रेव हार्ट्स'
आयुश्री ने आगे पिता को खोने का दर्द साझा करते हुए कहा, 'पिता को खोना मेरे लिए सबसे बड़ा झटका था। उस उम्र में मैं बस इतना समझती थी कि मेरी दुनिया बदल गई है। लेकिन मैंने उस दर्द को अपनी ताकत बना लिया। मैंने 'ब्रेव हार्ट्स' नाम की एक मुहिम शुरू की। ये उन बच्चों के लिए है जिन्होंने किसी अपने को खोया है। अब तक हम सैकड़ों परिवारों तक पहुंचे हैं। वहां हमने इमोशनल सपोर्ट दिया, स्कॉलरशिप दी और खुलकर बात करने की एक सुरक्षित जगह दी। हम अक्सर मरने वालों पर शोक मनाते हैं, पर जो जिंदा रहकर रोज दर्द झेलते हैं, उनकी कोई नहीं सुनता। 'ब्रेव हार्ट्स' ऐसे लोगों को आवाज देने की मेरी कोशिश है।'
पढ़ाई, खेल और पेजेंट को साथ कैसे संभालती हैं?
अपनी पढ़ाई और काम दोनों को मैनेज कैसे करती हैं। इस सवाल पर आयुश्री ने कहा, 'मेरे लिए डिसिप्लिन सबसे बड़ी ताकत हैं। पढ़ाई मेरी नींव है, खेल मेरी ताकत और पेजेंट मेरी आवाज है। मैं हर काम में पूरी तरह से जुड़ी रहती हूं। फिर चाहे वो पढ़ाई हो, बास्केटबॉल का मैच हो या रैंप वॉक।'
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डीयू से साइकोलॉजी की पढ़ाई कर रही हैं आयुश्री
आयुश्री दिल्ली यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी की पढ़ाई कर रही हैं। 12वीं में उन्होंने 96% अंक हासिल किए थे। वह इंटर-जोनल बास्केटबॉल खिलाड़ी हैं। जोनल डिबेट चैंपियन भी रही हैं। उन्होंने टाइम्स फैशन वीक जैसे मंच पर कई बड़े डिजाइनर्स के साथ भी काम किया है।
ऐसे कर रहीं मिस सुप्रानेशनल 2025 की तैयारी
मिस सुप्रानेशनल 2025 की अपनी तैयारी को लेकर आयुश्री ने बताया, 'मैं सिर्फ कम्पटीशन के लिए नहीं, लोगों से जुड़ने के लिए तैयारी कर रही हूं। मैं अपने शरीर को फिटनेस से तैयार कर रही हूं। अपने मन को मेडिटेशन से संभाल रही हूं। और खुद को दूसरों की मदद करके मजबूत बना रही हूं। मैं जानती हूं कि इस मंच पर सिर्फ सुंदरता नहीं, सोच और भावनात्मक जुड़ाव ज्यादा मायने रखता है।'
मेंटर की इस सलाह ने बदल दी सोच
एक वाकये को याद करते हुए आयुश्री ने बताया कि एक बार मेरी मेंटर ने मुझसे कहा - ताकतवर बनने के लिए जोर से बोलने की जरूरत नहीं होती। इस एक बात ने मेरी सोच बदल दी। मैंने सीखा कि शांत आत्मविश्वास और सच्चाई ज्यादा असरदार होते हैं। अब मैं इस बात को हर स्टेज और हर मौके पर याद रखती हूं।
साइकोलॉजी और 'ब्रेव हार्ट्स' का रिश्ता
आयुश्री ने कहा, 'साइकोलॉजी ने सिखाया कि समझना सबसे पहली चीज होती है। तभी हीलिंग शुरू होती है। 'ब्रेव हार्ट्स' में हम बच्चों की मदद करने के लिए इम्पैथी का इस्तेमाल करते हैं। ध्यान से सुनते हैं। और ट्रॉमा की सही समझ से काम करते हैं। मेन्टल हेल्थ कोई लग्जरी नहीं, ये जरूरत है। खासकर जब आप किसी को दोबारा जीने की हिम्मत देना चाहते हैं।'
देश की लड़कियों के लिए मैसेज
देश की बाकी लड़कियों को संदेश देते हुए आयुश्री ने कहा, 'आपके सपने सच्चे हैं। आपकी आवाज भी। किसी को ये मत कहने दीजिए कि आप कमजोर हैं। मेहनत से आगे बढ़िए। अपने जख्मों को गर्व से दिखाइए। गरिमा का मतलब कमजोरी नहीं होता। ये आपकी असली ताकत है। अगर मैं ये कर सकती हूं, तो आप भी कर सकती हैं। उठते रहिए, बढ़ते रहिए।'