असम के दिग्गज गायक जुबीन गर्ग की रहस्यमयी मौत की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। 19 सितंबर को सिंगापुर में हुई उनकी अचानक मौत के बाद से ही पुलिस और जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। अब इस मामले में असमी अभिनेत्री निशिता गोस्वामी और जुबीन के साथी संगीतकार शेखर ज्योति गोस्वामी शनिवार को असम पुलिस की क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) के सामने पेश हुए।
CID की जांच और केस दर्ज
असम CID ने इस पूरे मामले को दर्ज किया है। यह केस BNS 2023 की धारा 61(2), 105 और 106(1) के तहत दर्ज हुआ है। इन धाराओं के तहत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और उससे जुड़े संभावित षड्यंत्र की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों का ध्यान अब इस ओर है कि सिंगापुर में हुई जुबीन गर्ग की कथित डूबने की घटना के पीछे कोई गहरी साजिश तो नहीं।
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घरों पर छापेमारी और बरामदगी
25 सितंबर को SIT और CID ने गायक के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, उनके करीबी संगीतकार शेखर ज्योति गोस्वामी और आयोजक श्यामकानु महंता के घरों पर छापेमारी की। इस दौरान पुलिस को कई अहम सबूत मिले, जिनमें पेनड्राइव, हार्ड डिस्क, कंप्यूटर CPU और जरूरी दस्तावेज शामिल हैं। इसके अलावा, शनिवार को गुवाहाटी स्थित श्यामकानु महंता के घर पर भी तलाशी अभियान चलाया गया। श्यामकानु ही नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के आयोजक थे, जिसके लिए जुबीन गर्ग सिंगापुर गए थे।
सिंगापुर में हुई मौत
जुबीन गर्ग की मौत की खबर ने पूरे असम और उत्तर-पूर्व भारत को हिला दिया था। 19 सितंबर को सिंगापुर में उनका निधन हुआ। इसके बाद 22 सितंबर को उनका पार्थिव शरीर दिल्ली लाया गया और फिर गुवाहाटी भेजा गया। 23 सितंबर को उनके पैतृक गांव कामरकुची (असम) में हजारों प्रशंसकों और राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू समेत कई बड़े नेता मौजूद थे। गायक को गन सैल्यूट भी दिया गया।
जांच से क्या निकल सकता है?
फिलहाल CID और SIT की टीम लगातार सबूत जुटा रही है। जिन लोगों से पूछताछ हो रही है, उनमें से कई गायक के करीबी और उनके कार्यक्रमों से जुड़े लोग हैं। निष्ठा गोस्वामी और शेखर ज्योति से हुई पूछताछ भी इसी कड़ी का हिस्सा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी नाम सामने आ सकते हैं। असम के लोग आज भी जुबीन गर्ग को केवल एक गायक नहीं बल्कि संस्कृति और अस्मिता की आवाज़ मानते हैं। उनकी अचानक मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब तलाशना अब जांच एजेंसियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।