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जुबीन गर्ग की मौत की जांच कर रहे न्यायिक आयोग को मिलेगा पूरा सहयोग, असम के सीएम हिमंत बिस्वा ने दिया आश्वासन

Tue, 04 Nov 2025 02:11 PM IST
पूनम कंडारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Zubeen Garg Death Investigation: सिंगर जुबीन गर्ग की मौत के मामले की जांच न्यायिक आयोग द्वारा की जा रही है। इस मामले में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। 
 
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असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, दिवंगत सिंगर जुबीन गर्ग - फोटो : एक्स (ट्विटर)
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विस्तार
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सिंगर जुबीन गर्ग की मौत के मामले की जांच गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया की अध्यक्षता वाले न्यायिक आयोग द्वारा की जा रही है। मंगलवार को असम सीएम ने इस न्यायिक आयोग को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। अपने एक्स (ट्विटर) अकाउंट पर उन्होंने लिखा, ‘हमारे प्यारे जुबीन गर्ग के दुखद निधन के कारणों की जांच के लिए सरकार ने निर्णय लिया है कि माननीय उच्च न्यायालय के एक वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का गठन किया जाएगा। हमें आयोग की कार्यवाही में पूर्ण सहयोग और सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि हर तथ्य सामने आए। न्याय पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता से हो।’ 

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न्यायिक आयोग ने शुरू की जांच 
जुबीन गर्ग की मौत की जांच न्यायिक आयोग शुरू कर चुका है। बताते चलें कि सिंगर की मौत 19 सितंबर को सिंगापुर में डूबने से हुई। वह वहां नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में हिस्सा लेने गए थे। सिंगर की माैत से उनके फैंस को गहरा सदमा लगा। मौत की जांच की बात उठने लगी। आखिर में सरकार ने एक एसआईटी भी बनाई, जिसने जुबीन गर्ग की मौत की जांच शुरू की। 

एसआईटी भी दाखिल करेगी आरोप पत्र 
सिंगर जुबीन गर्ग की मौत के मामले में पहले भी असम सीएम सरमा ने कहा था कि एसआईटी (स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम) 8 दिसंबर तक आरोप पत्र दाखिल कर देगी। सीएम ने पुष्टि की कि सिंगर जुबीन गर्ग की मौत के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए सभी लोग न्यायिक हिरासत में हैं। उन सभी पर हत्या का आरोप लगाया गया है। मीडिया से बात करते असम के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘ वे लोग न्यायिक हिरासत में हैं। सभी पर हत्या के आरोप हैं। यह कोई नया खुलासा नहीं है, पहले दिन से ही यही स्थिति रही है।’ असम सीएम आगे कहते हैं, ‘अगर मामला हत्या का है या आजीवन कारावास या किसी गंभीर अपराध का है, तो पुलिस गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल करने के लिए बाध्य होती है। लेकिन हमने घटना की तारीख से 90 दिन का समय लिया है। हमने 8 दिसंबर के आसपास आरोपपत्र दाखिल करने का फैसला किया है।’  

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